
हिट-एंड-रन की कैपिटल कैसे बना भारत? क्या है हादसों की वजह और पीड़ितों को क्यों नहीं मिल पाता न्याय
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दिग्गज मैराथन रनर फौजा सिंह का हाल में हुए एक हिट-एंड-रन हादसे में निधन हो गया. साल 2022 में भारत में ऐसे हादसों में 30,400 से ज़्यादा लोग मारे गए. लेकिन लोग मौके से भागकर पीड़ित को क्यों छोड़ देते हैं? पुलिस भी जांच से बचने के लिए हादसों को हिट-एंड-रन केस क्यों बना देती है. क्या भारत में हिट-एंड-रन के मामलों में कमी लाई जा सकती है?
सोलह साल के अक्षय कुमार सिंह, जो नेशनल लेवल का तैराक बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे. 5 मई 2009 की रात बिजनौर, उत्तर प्रदेश में एक बारात में नाच रहे थे. तभी अचानक बैंड बंद हो गया. जब अक्षय के पिता राकेश सिंह अचानक सन्नाटे का कारण जानने गए, तो उन्हें बताया गया कि उनके बेटे और बारात में शामिल एक अन्य व्यक्ति को ट्रक ने कुचल दिया है. ट्रक ड्राइवर यह जानते हुए भी कि उसने दो लोगों को कुचल दिया है, मौके से भाग गया.
राकेश सिंह उस त्रासदी को याद करते हुए कहते हैं, 'उसका चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था और मैंने शर्ट से उसकी पहचान की.' इस हादसे ने उनके परिवार को हमेशा के लिए बदल दिया.
बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई
पुलिस ने FIR दर्ज कर ली, लेकिन बस इतना ही किया. एक टॉप एनर्जी PSU में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले राकेश सिंह ने अपने बेटे की मौत को भारत में लगातार बढ़ती हिट-एंड-रन लिस्ट में दर्ज एक और मौत का आंकड़ा बनने नहीं दिया. इस तरह एक पिता की अपने बेटे के हत्यारे को खोजने की लड़ाई अकेले शुरू हो गई. हालांकि वह कामयाब रहे, लेकिन सिस्टम ने उन्हें नाकाम कर दिया.
अभी अंधेरा भी नहीं हुआ था कि 14 जुलाई 2025 को पंजाब के जालंधर में अपने पैतृक गांव में सड़क पार करते वक्त हुए हादसे में दिग्गज मैराथन रनर फौजा सिंह की मौत हो गई.
जबकि ज्यादातर हिट-एंड-रन मामलों की जांच कभी नहीं की जाती और पीड़ित परिवारों को समाधान नहीं मिल पाता, 114 वर्षीय मैराथन रनर की मौत पर मीडिया का फोकस होने से पुलिस को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा. पुलिस ने ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया, जो कनाडा से लौटा एक युवक था.

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