
हाथ के टैटू, वायरलेस फोन, जिगिशा मर्डर के CCTV फुटेज... सौम्या विश्वनाथन के कातिलों तक ऐसे पहुंची थी दिल्ली पुलिस
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Soumya Vishwanathan Case: दिल्ली में साल 2008 में हुई पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में अदालत ने चार आरोपियों रवि कपूर, अमित शुक्ला, अजय कुमार और बलजीत मलिक को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. आरोपियों तक पुलिस टैटू, सीसीटीवी और टोपी की मदद से पहुंची.
राजधानी दिल्ली में साल 2008 में हुई पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषी करार दिया है. अधिकारियों ने बताया कि हाथ में बना टैटू, एक पुलिसकर्मी से चोरी हुआ वायरलेस सेट और सीसीटीवी फुटेज ने दिल्ली पुलिस को आईटी पेशेवर जिगिशा घोष की हत्या के मामले को सुलझाने में मदद की और अंततः जांचकर्ताओं को सौम्या विश्वनाथन के हत्यारों तक पहुंचाया.
रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत मलिक, जिन्हें 2009 में घोष की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, ने बाद में सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले में अपनी संलिप्तता कबूल कर ली. चारों आरोपियों - कपूर, शुक्ला, मलिक और अजय कुमार को कोर्ट ने एक संगठित हत्या का दोषी ठहराया.अदालत ने पांचवें आरोपी अजय सेठी को धारा 411 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया.
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दफ्तर से अपने घर लौट रही थीं सौम्या
15 साल पहले 30 सितंबर 2008 को सौम्या विश्वनाथन (25) रात 3 बजे विडियोकॉन टावर में अपने ऑफिस से वसंत कुंज में अपने घर के लिए निकलीं थीं. सौम्या खुद कार ड्राइव कर रही थीं. उसी वक्त आरोपी रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक और अजय भैंगा भी अपनी कार से वहीं से जा रहे थे. चारों को वसंत विहार में इन्हें धीमी गति से जा रही कार में अकेली जाती सौम्या नजर आई. आरोपियों ने उनके पीछे अपनी कार लगा दी. आरोपियों ने कई बार सौम्या को ओवरटेक कर रोकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे जिसके बाद गुस्से में आकर रवि ने अपनी पिस्तौल से सौम्या पर फायर कर दिया. गोली कार का सीसा तोड़ते हुए सौम्या के सिर में जा लगी.
टैटू, वायरलेस सैट और टोपी ने निभाई अहम भूमिका

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