
हजारों पाबंदियों के बाद भी North Korea कैसे कर रहा गुजर-बसर, रूस या चीन- कौन ज्यादा मददगार?
AajTak
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नॉर्थ कोरिया के दौरे पर हैं. इस बीच कहा जा रहा है कि अब किम जोंग को किसी नई पाबंदी से डरने की जरूरत नहीं क्योंकि रूस उसके साथ है. दो हजार से कुछ ज्यादा पाबंदियां झेलता उत्तर कोरिया न तो किसी के साथ खुलकर व्यापार कर सकता है, न ही इंटरनेशनल मदद ले पाता है. फिर वो कौन सा सपोर्ट सिस्टम है, जिससे वो टिका हुआ है?
दो जिद्दी लेकिन उतने ही ताकतवर नेताओं- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई लीडर किम जोंग उन की दोस्ती लगातार गाढ़ी होती दिख रही है. कुछ समय पहले किम जोंग ने रूस का दौरा किया था. अब पुतिन उनके देश गए हुए हैं. दोनों देशों में कई बातें कॉमन हैं. जैसे दोनों ही अमेरिका से बैर ठाने रहते हैं. साथ ही आक्रामक नीतियों के चलते दोनों कई तरह की ग्लोबल पाबंदियां झेल रहे हैं. रूस तो फिर भी अमीर देश है, लेकिन सवाल ये है कि नॉर्थ कोरिया का काम कैसे चल रहा है! जानिए, बैन में भी कैसे टिका हुआ है उत्तर कोरिया.
किन-किन ने लगाया बैन इसमें यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन की तरफ से लगाए गए सेंक्शन्स शामिल हैं. इसमें लोगों के अलावा संस्थाओं के एसेट फ्रीज करना, ट्रैवल बैन और पाबंदी के तहत आने वालों के लिए किसी भी फंड पर रोक लगाना शामिल है.
क्यों लगे सेंक्शन्स उत्तर कोरिया ने 2006 से अब तक कई परमाणु परीक्षण किए. साथ ही साथ कोरियाई लीडर कई बार आक्रामक बातें भी करते हैं. यही देखते हुए यूएनएससी ने उसपर कई पाबंदियां लगा दीं. इस देश से मानवाधिकारों को तोड़ने की खबरें भी आती रहीं, जो खुद वहां से भागकर अमेरिका या दक्षिण कोरिया पहुंचे हुए लोग कहते हैं. इंटरनेशनल कम्युनिटी ने इस वजह से भी काफी सारे बैन लगाए.
कितने बैन हैं देश पर और कैसे हो रहा मैनेज? पाबंदियों की वजह से उत्तर कोरिया ज्यादातर देशों के साथ खुलकर व्यापार नहीं कर पाता. इसके बाद भी जब-तब उसके मिसाइल परीक्षण की बात आती रहती है. पैसों के लिए उसके स्त्रोत बाकी देशों से काफी अलग हैं. यूएन की रिपोर्ट कहती है कि अपने लिए पैसे जुटाने के लिए वो क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज पर साइबर अटैक कर पैसे की उगाही करता है. आय का बड़ा स्त्रोत कथित तौर पर तस्करी भी है. यूएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सालभर में ये देश 370 मिलियन डॉलर कोयले के अवैध व्यापार से कमाता है.
कोयले की तस्करी के आरोप नॉर्थ कोरिया के लिए आय का बड़ा स्त्रोत कथित तौर पर तस्करी भी है. यूएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सालभर में ये देश 370 मिलियन डॉलर कोयले के अवैध व्यापार से कमाता है. साल 2017 में चीन ने यूनाइटेड नेशन्स का साथ देने के नाम पर सालभर के लिए उससे कोयले का करार रोक दिया था, लेकिन तब भी कोल इंडस्ट्री फलती-फूलती रही.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?










