
स्वामी चैतन्यानंद आगरा से गिरफ्तार, छात्राओं से यौन शोषण के आरोप में दिल्ली पुलिस ने दबोचा
AajTak
निजी मैनेजमेंट संस्थान में छात्राओं का यौन उत्पीड़न करने वाले स्वामी चैतन्यनंद सरस्वती को गिरफ्तार कर लिया गया है. उसकी गिरफ्तारी आगरा से की गई है.
दिल्ली के एक निजी मैनेजमेंट संस्थान में छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को गिरफ्तार कर लिया गया है. उसकी गिरफ्तारी आगरा से हुई है. छात्राओं के आरोप के बाद से ही आरोपी की पुलिस तलाश कर रही थी. उसकी आखिरी लोकेशन आगरा में मिली थी. जिसके बाद से पुलिस आगरा और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही थी.
पुलिस के मुताबिक छात्राओं से यौन उत्पीड़न के आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को गिरफ्तार कर लिया गया है. गिरफ्तारी बीती रात करीब 3.30 बजे एक होटल से की गई है. वह पिछले कई दिनों से आगरा में छिपा था. फिलहाल उससे मामले में पूछताछ की जा रही है और मेडिकल कराया जा रहा है.
यह भी पढ़ें: 18 अकाउंट, 28 एफडी, 18 करोड़ फ्रीज, 55 लाख की निकासी... चैतन्यानंद के पास कहां से आई इतनी दौलत, जांच में क्या सामने आया
मार्च में दर्ज हुई थी चैतन्यानंद के खिलाफ शिकायत
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटे की एक छात्रा ने मार्च 2025 में शिकायत दर्ज कराई थी. जिसमें आरोप लगाया गया था कि 60,000 रुपये का चंदा देने के बावजूद उससे अतिरिक्त राशि मांगी गई थी.
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली स्थित प्रबंधन संस्थान के पूर्व अध्यक्ष चैतन्यानंद (62) ने संस्थान के अंदर अपने वफादारों का एक नेटवर्क बनाया था और उन्हें ऐसे पदों पर नियुक्त किया था जिनके लिए वे योग्य भी नहीं थे.

यूपी में जल जीवन मिशन में लापरवाही पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. 12 जिलों के 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया गया, जबकि अन्य पर जांच, नोटिस और तबादले की कार्रवाई हुई है. खराब गुणवत्ता, धीमी प्रगति और शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घर नल योजना में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कड़क है नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय! 54 सीटों में छुपा सत्ता का स्वाद, स्विंग वोटर्स करेंगे असली फैसला
उत्तर बंगाल की 54 सीटें पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं, जहां चुनावी ‘चाय’ का स्वाद हर बार बदलता है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर में यह इलाका स्विंग जोन की भूमिका निभाता है. चाय बागान, पहाड़ी राजनीति, आदिवासी और राजवंशी वोटबैंक जैसे कई फैक्टर नतीजों को प्रभावित करते हैं. छोटे वोट शिफ्ट भी यहां बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ जाएगी.

मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.










