
सूडान में अर्धसैनिक बलों ने 85 लोगों को मार डाला, गांव को लूटकर लगा दी आग
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के इस हमले में 150 से अधिक ग्रामीण घायल हुए हैं. बता दें कि पिछले साल अप्रैल में युद्ध शुरू होने के बाद से RSF पर बार-बार देश भर में नरसंहार, बलात्कार और अन्य गंभीर उल्लंघनों के आरोप लगते रहे हैं.
सूडान से एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां शनिवार को अर्धसैनिक समूह के लड़ाकों ने एक गांव पर हमला बोला जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 85 लोगों की हत्या कर दी गई. घरों में आग लगा दी गई और जमकर तोड़फोड़ हुई. अधिकारियों ने बताया कि पिछले 18 महीने से चल रहे संघर्ष की ये सबसे खतरनाक घटना है. सूडान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के इस हमले में 150 से अधिक ग्रामीण घायल हुए हैं.
बता दें कि पिछले साल अप्रैल में युद्ध शुरू होने के बाद से RSF पर बार-बार देश भर में नरसंहार, बलात्कार और अन्य गंभीर उल्लंघनों के आरोप लगते रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना का जिक्र करते हुए 3 ग्रामीणों ने बताया कि सैकड़ों की संख्या में RSF लड़ाके गांव में दाखिल हुए थे और उन्होंने इलाके को घेर कर घंटों फायरिंग की और लूटपाट की. एपी की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में 80 से ज्यादा शव दिखे, जिसमें 24 महिलाएं और नाबालिग शामिल थे.
बता दें कि सूडान में हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, लड़ाई शुरू होने के बाद से अब तक 10.7 मिलियन से अधिक लोग अपने घरों से भागने के लिए मजबूर हुए हैं. उनमें से 2 मिलियन से अधिक पड़ोसी देशों में भाग गए हैं.
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जानें क्यों हैं ऐसे हालात सूडान में ये सारी लड़ाई सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच छिड़ी है. इसकी शुरुआत पिछले साल 15 अप्रैल को तब हुई थी, जब सेना के कमांडर जनरल अब्देल-फतह बुरहान और आरएसएफ के प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान डगलो के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया था. लेकिन इसकी जड़ें अप्रैल 2019 से जुड़ी हैं. उस समय सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति उमर अल-बशीर के खिलाफ जनता ने विद्रोह कर दिया था. अक्टूबर 2021 में सेना ने अल-बशीर की सरकार का तख्तापलट कर दिया था. बशीर को सत्ता से बेदखल करने के बावजूद संघर्ष जारी रहा.
बाद में सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच एक समझौता हुआ. समझौते के तहत एक सोवरेनिटी काउंसिल बनी. जनरल बुरहान काउंसिल के अध्यक्ष तो जनरल डगलो उपाध्यक्ष बने. इस काउंसिल ने तय किया कि अक्टूबर 2023 के आखिर में चुनाव कराए जाएंगे. लेकिन धीरे-धीरे दोनों जनरलों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया.ये मनमुटाव एक जंग में तब बदल गया जब राजधानी खारतौम में सेना और पैरामिलिट्री फोर्स आमने-सामने आ गई थीं. दोनों ने बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक उतार दिए थे और एक-दूसरे पर गोलीबारी शुरू कर दी थी.

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