
सुरंग में अटकी 41 मजदूरों की जान... 9 दिन बाद पहली बार भेजा खाना! रेस्क्यू में देरी पर कोर्ट ने मांगा जवाब
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में चल रहे सुरंग के रेस्क्यू ऑपरेशन में कई सरकारी एजेंसियां जुटी हुई हैं और उन्हें अलग-अलग काम सौंपे गए हैं. ये एजेंसियां मजदूरों की सुरक्षित निकासी के लिए अथक प्रयास कर रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्टिकल रेस्क्यू टनल को बनाने के लिए क्या तैयारी है...
उत्तरकाशी के सिल्क्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जोरों पर जारी है. सभी मजदूरों की जिंदगियों को बचाने के लिए सरकार लगातार संपर्क बनाए हुए है और 2 किमी लंबी सुरंग में फंसे मजदूरों का मनोबल बनाए रखने के लिए सभी प्रयास कर रही है. सुरंग का यह 2 किमी का हिस्सा कंक्रीट कार्य सहित पूरा हो गया है, जिसके बीच मजदूर अभी तक सुरक्षित हैं.
सुरंग के इस हिस्से में बिजली और पानी मौजूद है और मजदूरों को 4 इंच कंप्रेसर पाइपलाइन के जरिए खाना-पानी और दवाएं आदि दी जाती रही हैं. लेकिन आज, एक बड़ी सफलता यह हासिल हुई कि एनएचआईडीसीएल ने खाना, दवाओं और अन्य जरूरी चीजों को नीचे पहुंचाने के लिए 6 इंच चौड़ी एक और पाइपलाइन की ड्रिलिंग पूरी कर ली है. इसके अलावा, आरवीएनएल जरूरी सामान को पहुंचाने के लिए एक और वर्टिकल पाइपलाइन पर काम कर रहा है.
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कई सरकारी एजेंसियां जुटी हुई हैं और उन्हें अलग-अलग काम सौंपे गए हैं. ये एजेंसियां मजदूरों की सुरक्षित निकासी के लिए अथक प्रयास कर रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्टिकल रेस्क्यू टनल को बनाने के लिए क्या तैयारी है...
मजदूरों के बचाव के लिए कुछ यूं चलाया जा रहा ऑपरेशन
- ऑगुर बोरिंग मशीन के जरिए मजदूरों के बचाव के लिए सिल्क्यारा छोर से NHIDCL द्वारा हॉरिजॉन्टल बोरिंग शुरू होने को है.
- वर्टिकल रेस्क्यू टनल के निर्माण के लिए SJVNL की पहली मशीन पहले ही सुरंग स्थल पर पहुंच चुकी है और BRO द्वारा पहुंच मार्ग का काम पूरा होने के बाद परिचालन शुरू किया जा रहा है. वर्टिकल सुरंग निर्माण के लिए दो अन्य मशीनों की आवाजाही सड़क मार्ग के जरिए गुजरात और ओडिशा से शुरू हुई.

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