
सुप्रीम कोर्ट से अब्दुल्ला आजम को नहीं मिली राहत, स्वार सीट पर होगा उपचुनाव
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सपा नेता अब्दुल्ला आजम खान ने एक मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है. हालांकि, उन्हें राहत नहीं मिली है. यूपी की स्थानीय कोर्ट के फैसले के बाद अब्दुल्ला की विधायकी चली गई थी और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था. अब्दुल्ला ने कोर्ट से स्वार सीट पर उपचुनाव पर भी रोक लगाने की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान की याचिका पर सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है. हालांकि, अब्दुल्ला को सजा पर रोक लगाने की मांग पर राहत नहीं मिली है. अब्दुल्ला को एक मामले में कोर्ट ने 2 साल की सजा सुनाई है, जिसके बाद वो विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य हो गए हैं. उन्होंने याचिका में अपनी अयोग्यता पर रोक की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के बाद जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की डबल बेंच ने यूपी सरकार को एक नोटिस जारी किया है, लेकिन अब्दुल्ला के अयोग्य घोषित होने के बाद खाली हुई स्वार विधानसभा सीट पर आगामी 10 मई को होने वाले उपचुनाव पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन स्पष्ट किया कि उपचुनाव का रिजल्ट हमारे अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा. बेंच ने मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह के लिए टाल दी है.
'कोर्ट के अंतिम ऑर्डर पर निर्भर करेगा चुनाव का रिजल्ट'
कोर्ट ने कहा- प्रतिवाद दाखिल होने दीजिए. 10 मई को होने वाले उपचुनाव को इस विशेष अनुमति याचिका के रिजल्ट के अधीन रहने दीजिए. सुनवाई के दौरान बेंच ने यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पूछा- क्या हम दोषी और सजा पाए व्यक्ति की नैतिकता का परीक्षण कर सकते हैं? क्या वह एक निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हो सकता है? आपको प्रथम दृष्टया यह साबित करना होगा कि उसने अपनी क्षमता से अपराध किया है.
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