
'सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी के लिए नहीं जताई सहमति', चीतों की मौत पर चिंता जताने वाले लेटर से दो एक्सपर्ट्स ने खुद को अलग किया
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कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत पर चिंता व्यक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को लिखे पत्र से दो विदेशी एक्सपर्ट्स ने खुद को अलग कर लिया है. शीर्ष अदालत को भेजे गए ईमेल में उन्होंने कहा कि उन्होंने इसके लिए सहमति नहीं जताई थी.
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत पर चिंता व्यक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को लिखे पत्र से दो विदेशी एक्सपर्ट्स ने खुद को अलग कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए ईमेल में चीता एक्सपर्ट विंसेंट वान डी मेरवे और डॉ. एंडी फ्रेजर ने कहा कि यह पत्र उनकी सहमति के बिना भेजा गया था. उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट को भेजे जाने वाले ऐसे पत्र के समर्थन में नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में अपना नाम देखकर वह हैरान थे. जिनमें दावा किया गया है कि चीता प्रोजेक्ट के साउथ अफ्रीका और नामीबिया के चार एक्सपर्ट्स ने चीतों की मौत पर गंभीर चिंता व्यक्त की है.
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ईमेल में क्या कहा गया?
सुप्रीम कोर्ट को 20 जुलाई को भेजे गए ईमेल को एक्सपर्ट विंसेंट वान डी मेरवे ने संबोधित किया है. इसमें दूसरे एक्सपर्ट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई एक्सपर्ट कमेटी का सदस्य बताया गया है. ईमेल में कहा गया है, "हमें पता चला है कि एक पत्र प्रसारित हो रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट को प्रोजेक्ट चीता के बारे में हमारी चिंताओं को दर्शाता है. कृपया जान लें कि डॉ. एंडी फ्रेजर और मैं सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए इस पत्र का समर्थन नहीं कर रहे थे."
ईमेल के जरिए एक्सपर्ट्स ने अपील की है कि पत्र को मीडिया या सुप्रीम कोर्ट के साथ साझा न किया जाए और इसे वापस ले लिया जाए. इसके अलावा यदि यह संभव नहीं है तो उनके नाम पत्र से हटा दिए जाएं.

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