
सुप्रीम कोर्ट के एक सवाल से 'दलित संकट' में फंसी सियासत, अब SC-ST क्रीमी लेयर पर क्या होगा?
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सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के संवैधानिक फैसले पर केंद्र सरकार से जवाब मांग लिया है. सवाल है कि एससी-एसटी आरक्षण में 'कोटा के भीतर कोटा' और क्रीमीलेयर लागू करने को लेकर अब सरकार क्या कदम उठाएगी? अदालत के एक सवाल ने दलित सियासत को फिर से गरमा दिया है और मोदी सरकार के सामने सियासी संतुलन की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन यानी यूजीसी के नए नियमों के विवाद से मोदी सरकार अभी निकल भी नहीं पाई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के मुद्दे पर रिपोर्ट मांग ली है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि संवैधानिक पीठ के 2024 में दिए गए फैसले के बाद क्या कार्रवाई की गई है, जिसमें एससी और एसटी के आरक्षण का वर्गीकरण और क्रीमी लेयर को लागू करने की बात कही गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त 2024 को एससी और एसटी के लोगों के बीच समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों को एससी-एसटी के आरक्षण को कोटा के भीतर कोटा बनाने की मंजूरी दी थी. साथ ही ओबीसी की तरह एससी-एसटी आरक्षण में भी क्रीमी लेयर व्यवस्था को लागू करने की बात कही थी.
सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले को लागू कराने की मांग को लेकर ओपी शुक्ला और समता आंदोलन समिति ने सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दायर की थी. इस माले पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई करते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि संवैधानिक पीठ के फैसले पर क्या कार्यवाई की गई है? ऐसे में एक बार फिर से एससी-एसटी आरक्षण के मुद्दे पर सियासत गर्मा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या करेगी केंद्र सरकार
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को सब-कैटेगरी बनाने का अधिकार राज्यों को देने और क्रीमीलेयर की व्यवस्था को लागू करने का फैसला देने के साथ ही 2024 में सियासत गर्मा गई थी. विपक्षी दल कांग्रेस से लेकर बीजेपी के कई सहयोगी दलों ने इस फैसले के खिलाफ खड़े नजर आ रहे थे. सर्वोच्च अदालत के फैसले को लेकर बसपा प्रमुख मायावती खुलकर विरोध में उतर गई थी. दलित समुदाय के लोग भी सड़क पर उतरकर विरोध शुरू कर दिए थे.
एससी और एसटी समुदाय के करीब 100 एनडीए सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी भी सूरत में लागू नहीं किया जाना चाहिए. इसके बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था कि एनडीए सरकार बीआर अंबेडकर के बनाए गए संविधान से बंधी है. इस संविधान में एससी/एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं. सरकार के इस आश्वासन के बाद एससी-एसटी समाज ने अपना विरोध बंद किया था.

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