
'सीमा पार गोलीबारी में मारे गए कश्मीरियों को भुलाया जा रहा', उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराजगी
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने हाल के तनावपूर्ण हफ्तों पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने सीमा के सटे जिलों में पाकिस्तान की ओर से की गई क्रॉस-बॉर्डर शेलिंग में मारे गए निर्दोष नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हमले में हमने मुसलमान, हिन्दू, सिख — सभी को खोया है.
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हालिया आतंकी घटनाओं पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग बाहर आए और कहा कि हम इसका समर्थन नहीं करते, पहलगाम हमले के बाद जनता खुद बाहर आकर इसका विरोध किया. अब्दुल्ला ने सीमा पार गोलाबारी के पीड़ितों की राष्ट्रीय मीडिया में कम चर्चा पर भी सवाल उठाया और श्रीनगर-जम्मू में ड्रोन गतिविधियों को अभूतपूर्व बताया. उमर अब्दुल्ला से इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने खास बातचीत की है.
राजदीप सरदेसाई: पहले पहलगाम हमला, फिर ऑपरेशन सिंदूर और फिर सीमा पार से गोलीबारी. आपके राज्य की जनता ने इन दो हफ्तों को कैसे झेला?
उमर अब्दुल्ला: बीते दो सप्ताह में जो भी हुआ बहुत अप्रत्याशित था. पहलगाम की घटना अचानक हुई. पिछले चार-पांच सालों से जम्मू-कश्मीर में शांति थी. लेकिन, शांति का माहौल ऐसे टूटेगा, इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. भारत की ओर से की गई कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान ने जो गोलीबारी कि उससे वो इलाके भी चपेट में आए जो अब तक पूरी तरह से सुरक्षित थे. हमने पूंछ, उरी जैसे सीमावर्ती इलाकों में 100 से ज्यादा लोगों को खोया है.
इतना ही नहीं, जम्मू जैसे इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए, जो अब तक अभूतपूर्व रही हैं. 1971 के युद्ध के बाद इस प्रकार की गतिविधियां जम्मू में नहीं देखी गईं थी.
राजदीप सरदेसाई: पहलगाम में आतंकियों ने हिंदू और मुस्लिम के बीच भेदभाव करने की कोशिश की. क्या इससे कश्मीरियों के बीच आक्रोश बढ़ गया है?
उमर अब्दुल्ला: इसमें कोई दो राय नहीं है कि लोगों के बीच हमले को लेकर आक्रोश है. लोग स्वत: बिना किसी नेतृत्व के बाहर आकर प्रदर्शन किया. यह न कोई सरकारी योजना थी, न किसी राजनीतिक दल का प्रयास. यह पूरी तरह से लोगों की प्रतिक्रिया थी. श्रीनगर, गांवों और अन्य जिलों में लोग बाहर आए खुलकर कहा कि ऐसे हिंसा का वह समर्थन नहीं करते हैं.

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