
सीक्रेट गुफाओं में छिपा भंडार, रूस का साथ... ईरान युद्ध के बीच भारत में ऐसे टला ऊर्जा संकट
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भारत ने अपनी दूरदर्शी रणनीति और 'इंडिया फर्स्ट' नीति के दम पर खुद को इस बड़े झटके से बचा लिया है. जहां पड़ोसी देश पाकिस्तान 'लॉकडाउन' जैसी स्थिति में है, वहीं भारत अपनी 'सीक्रेट ऑयल केव्स' यानी भूमिगत तेल गुफाओं और रूस के साथ कूटनीतिक तालमेल के कारण मजबूती से खड़ा है.
ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है. भारत के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी लगभग 90% कच्चे तेल की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है. इसके अलावा एलपीजी का लगभग 60% और एलएनजी का करीब 50% भी विदेशों से आता है.
हालांकि भारत ने अपनी दूरदर्शी रणनीति और 'इंडिया फर्स्ट' नीति के दम पर खुद को इस बड़े झटके से बचा लिया है. जहां पड़ोसी देश पाकिस्तान 'लॉकडाउन' जैसी स्थिति में है, वहीं भारत अपनी 'सीक्रेट ऑयल केव्स' यानी भूमिगत तेल गुफाओं और रूस के साथ कूटनीतिक तालमेल के कारण मजबूती से खड़ा है. दरअसल, सरकार ने रणनीति के तहत पिछले कुछ वर्षों में भूमिगत तेल भंडारण गुफाएं (Underground Oil Storage Caverns) बनाईं और तेल आयात के स्रोतों को व्यापक रूप से विविध बनाया गया. इन कदमों ने भारत को अचानक आने वाले ऊर्जा संकट से काफी हद तक बचाया है.
भारत के पास कितने दिनों का तेल भंडार
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल करीब 25 दिनों का कच्चा तेल भंडार मौजूद है. इसके अलावा पेट्रोल और डीजल का स्टॉक भी लगभग 25 दिन तक चल सकता है. रसोई गैस यानी एलपीजी की उपलब्धता 25-30 दिनों तक बनी रह सकती है, जबकि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली एलएनजी का भंडार लगभग 10 दिनों का है.
भारत की ‘सीक्रेट’ भूमिगत तेल गुफाएं
भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सबसे अहम आधार उसकी भूमिगत रणनीतिक तेल भंडारण गुफाएं हैं. ये तीन प्रमुख स्थानों पर बनाई गई हैं- विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में. इन गुफाओं को भारतीय सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड ने विकसित किया है. इनकी कुल भंडारण क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (करीब 4 करोड़ बैरल) है, जो भारत की लगभग 10 दिनों की जरूरत पूरी कर सकती है.

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