
'सीएम बनने के लिए शरद पवार के पैरों में किया सरेंडर...', कोल्हापुर में उद्धव पर बरसे अमित शाह
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उद्धव ठाकरे के हाथ से पहले महाराष्ट्र की सत्ता फिसली और अब उनके हाथ से शिवसेना का नाम और निशान छिन गया है. चुनाव आयोग ने अब शिवसेना की कमान शिंदे गुट को सौंप दी है. इसके बाद सूबे में सियासी उबाल आ गया है. गृहमंत्री अमित शाह ने उद्धव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने हमारे साथ विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े-बड़े कट-आउट के साथ लड़ा था, लेकिन जब नतीजे आए तो उन्होंने शरद पवार के पैरों में सरेंडर कर दिया.
महाराष्ट्र में उद्धव गुट के हाथ से पार्टी का नाम और निशान छिनने के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. उद्धव के हमले के बाद अब बीजेपी ने करारा पलटवार किया है. कोल्हापुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उद्धव ठाकरे पर जमकर बरसे.
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हिंदूह्रदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को उद्धव ठाकरे ने शरद पवार के पैरों में सरेंडर करा दिया. गृहमंत्री बोले के उद्धव ने हमारे साथ विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े-बड़े कट-आउट के साथ लड़ा था, लेकिन जब नतीजे आए तो उन्होंने शरद पवार के पैरों में सरेंडर कर दिया.
ठाकरे पर हमला बोलते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हम सत्ता के लालची नहीं हैं और न ही हमने कभी अपने सिद्धांतों का बलिदान किया है. पिछला महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ा गया था. पीएम मोदी और मैंने अपनी रैलियों के दौरान खुले तौर पर यह बात कही थी. इसके बावजूद ठाकरे ने विपक्ष के साथ हाथ मिलाया.
एजेंसी के मुताबिक कोल्हापुर में भाजपा कार्यकर्ताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ठाकरे का नाम लिए बिना कहा कि 'छल से आप कुछ दिनों के लिए सत्ता हासिल कर सकते हैं, लेकिन जब युद्ध के मैदान की बात आती है, तो आपको जीतने के लिए साहस की जरूरत होती है.
शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने और उसे शिवसेना का निशान तीर-कमान देने के चुनाव आयोग के फैसले की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि वे (ठाकरे गुट) अब सबक सीखेंगे.
दरअसल, उद्धव ठाकरे ने 2019 के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया था. उद्धव ने राकांपा और कांग्रेस के साथ महाविकास अघाड़ी का नेतृत्व किया था, हालांकि पिछले साल जून में एकनाथ शिंदे गुट की बगावत के बाद MVA को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था.

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