
सिर्फ बाबरी विध्वंस नहीं, कुशल प्रशासक के तौर पर भी याद किए जाएंगे कल्याण सिंह, फोटो में देखें राजनीतिक यात्रा
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बीजेपी को मजबूत करने में जितनी भूमिका अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की थी, कल्याण सिंह की भी उससे कम नहीं थी. वाजपेयी बीजेपी का ब्राह्मण चेहरा हुआ करते थे तो कल्याण सिंह ओबीसी चेहरे के साथ-साथ हिंदू-हृदय सम्राट के तौर पर जाने जाते थे.
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का शनिवार शाम लखनऊ के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 89 वर्ष के थे. कल्याण सिंह बीजेपी के उन चुनिंदा नेताओं में से एक रहे, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता की बुलंदी तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की. अयोध्या आंदोलन ने बीजेपी के कई नेताओं को देश की राजनीति में एक पहचान दी, लेकिन राम मंदिर के लिए सबसे बड़ी कुर्बानी पार्टी नेता कल्याण सिंह ने ही दी. 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद उन्होंने सीएम पद से त्यागपत्र दे दिया. कल्याण ने राम मंदिर के लिए सत्ता ही नहीं गंवाई, बल्कि इस मामले में सजा पाने वाले वे एकमात्र शख्स रहे.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









