
क्रॉस वोटिंग... राज्यसभा चुनावों में विपक्ष अपने विधायकों को साथ क्यों नहीं रख पाता?
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राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और विधायकों के गैरहाजिर रहने के कारण विपक्षी दलों के सारे समीकरण खराब हो गए. विपक्षी दलों के लिए सबसे बुरा हाल तो बिहार में देखने को मिला है, लेकिन हरियाणा और ओडिशा की कहानी भी मिलती जुलती ही है.
राज्यसभा की 37 सीटों में से बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों पर ही चुनाव होने थे, क्योंकि 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए थे. फिर भी तीनों राज्यों में कुछ न कुछ ऐसा हुआ जिससे कई उम्मीदवारों की संभावित जीत एक झटके में हार में तब्दील हो गई - सबसे ज्यादा दिलचस्प मामला बिहार में देखने को मिला.
जिन 11 सीटों पर चुनाव हुए, उनमें 9 सीटों पर NDA प्रत्याशी या एनडीए समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. बची दो सीटों में से एक कांग्रेस और एक BJD के हिस्से में आई है. कांग्रेस को तो लगभग हर जगह उसके विधायकों ने धोखा दिया है, सबसे ज्यादा फजीहत बिहार में हुई है.
बिहार में तेजस्वी यादव ने BSP नेता मायावती और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी तक का सपोर्ट हासिल कर लिया था, लेकिन कांग्रेस के साथ साथ आरजेडी के भी एक विधायक के धोखा दे देने से ऐन वक्त पर गच्चा खा गए.
कहां कहां हुई क्रॉस वोटिंग
16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग, कहीं विधायकों के गायब हो जाने तो कहीं वोटिंग से दूरी बना लेने के कारण बाजी पलट गई. हरियाणा में दो कांग्रेस विधायकों के वोटों पर बीजेपी की आपत्ति के कारण काउंटिंग देर से शुरू हुई, और बिहार में तो बीजेपी ने जैसे विधानसभा चुनावों की तरह क्लीन स्वीप ही कर दिया.
1. बिहार में गैरों का साथ, अपनों से धोखा मिला: एनडीए की चार सीटें तो पहले से ही तय थीं, बिहार में पांचवीं सीट पर जीत के लिए एनडीए को 3 विधायकों की जरूरत थी, और वैसे ही महागठबंधन को 6 विधायकों की. महागठबंधन के लिए 6 विधायक जुटाना काफी मुश्किल था. फिर भी तेजस्वी यादव ने असदुद्दीन ओवैसी और मायावती को समझाने की कोशिश की, और कामयाब भी रहे.

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