
सालों तक कच्चा वीगन फूड खाने पर रूसी इन्फ्लुएंसर की मौत, एक्सट्रीम डाइट से शरीर में होते हैं ये खौफनाक बदलाव
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20वीं सदी में लोग अपने वजन को लेकर काफी सोचने लगे थे. इस दौरान मार्केट में एक से बढ़कर एक एक्सट्रीम डाइट आईं. कुछ डॉक्टर खाने के बीच सिरगेट पीने की सलाह देते थे ताकि भूख कम लगे. तभी एक डाइट ने तहलका मचा दिया. ये टेपवार्म डाइट थी, जिसमें पतले रहने की जिद में पेट के कीड़े तक खाने लगे. यहां तक कि अखबारों में इसके एड आने लगे.
एक्सट्रीम डाइट का चलन हाल का नहीं, बल्कि सदियों से ऐसा हो रहा है. खासकर विक्टोरियन काल में महिलाओं के लिए ऐसे कपड़े बने थे, जो बेहद पतली कमर में ही फिट हो सकें. इसके लिए तरह-तरह की डाइट आ निकली. इसमें से एक थी- टेपवार्म डाइट. लोग कैप्सूल में भरे हुए कीड़ों के अंडे खरीदते और पानी से उसे निगल लेते थे. इसके बाद वे चाहे जो खाएं, वजन कम ही रहता. होता यह था किये कीड़े न्यूट्रिशन सोख जाते और लोग दुबले-पतले बने रहते.
जल्द ही इसका साइड-इफेक्ट दिखा. कैप्सूल से भीतर पहुंच ये कीड़े बढ़ते हुए ब्रेन तक पहुंचने लगे. इनके अंडों की वजह से लोगों को मिर्गी के दौरे पड़ने लगे. कईयों की आंखें खराब हो गईं. डायरिया की वजह से मौतें होने लगीं.
बाद में विक्योरियन इंग्लैंड में टेपवार्म कैप्सूल पर पूरी तरह से रोक लग गई. अब भी इंटरनेट पर खोजें तो इस पर लंबे लेख मिलते हैं. हाल ही में अपने यहां एक्सट्रीम डाइट पर जोर को देखते हुए यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस पर आधिकारिक बैन लगा दिया.
रूसी महिला की मौत ने खड़े किए सवाल
एक्सट्रीम डाइट की वजह से हाल ही में एक रूसी सोशल मीडिया इंफ्यूएंसर की मौत हो गई. ज्हाना सैमसोनोवा सालों से सिर्फ कच्चा शाकाहारी फूड खा रही थीं. यहां तक कि उनकी दोस्त का कहना था कि वे लंबे समय से कच्चा कटहल खाकर जिंदा थीं. काफी लंबे समय तक वीगन रॉ फूड डाइट पर रहने के चलते ज्हाना में पोषण की इतनी कमी हो गई कि बीमार होने लगीं और इसी हालत में उनकी मौत हो गई.
क्या है वीगन डाइट इसमें पशुओं या उनके जरिए तैयार किए गए उत्पाद जैसे- डेयरी प्रोडक्ट, दूध, शहद, पनीर, मक्खन, अंडे और मांस का सेवन नहीं किया जाता. इस डाइट में केवल फलीदार पौधे, अनाज, बीज, फल, सब्जियां, और ड्राई फ्रूट्स शामिल होते हैं. ये वेजिटेरिटयन डाइट से अलग है जिसमें डेयरी प्रोडक्ट खाने पर मनाही नहीं होती. वीगन डाइट के बारे में बार-बार कहा जाता है कि ये लंबे वक्त के लिए सही नहीं क्योंकि इससे शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता. इसके बाद भी इसका चलन काफी बढ़ निकला है.

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