
सलमान खान नहीं, 'मुंबई अंडरवर्ल्ड' है असली वजह... हैरान कर देगी बाबा सिद्दीकी के कत्ल की इनसाइड स्टोरी
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Baba Siddiqui Murder Case: पिछले 48 घंटो की तफ्तीश के बाद पकड़े गए और फरार आरोपियों की मुंबई पुलिस ने जो कड़ियां जोड़ी हैं. वो फिलहाल यही इशारा कर रही हैं कि इसके पीछे लॉरेंस गैंग का हाथ हो सकता है. मुंबई पुलिस को ऐसा क्यों लगता है आइए समझते हैं.
14 जुलाई को मुंबई की मकोका कोर्ट में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 1736 पन्नों की एक चार्जशीट दाखिल की थी. ये चार्जशीट 14 अप्रैल को बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट पर हुए शूटआउट को लेकर थी. इस चार्जशीट में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई सहित कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इसमें एक जगह क्राइम ब्रांच ने लिखा था कि सलमान को धमकी तो एक बहाना है. असल में लॉरेंस पूरे मुंबई पर राज करना चाहता है. वो मुंबई अंडरवर्ल्ड पर अपना कंट्रोल चाहता है. अब बाबा सिद्दीकी के कत्ल के बाद दो सवाल पूछे जा रहे हैं. पहला, क्या इस कत्ल के पीछे लॉरेंस गैंग है और दूसरा कि यदि वही है तो फिर बाबा सिद्दीकी को ही क्यों निशाना बनाया गया?
पिछले 48 घंटो की तफ्तीश के बाद पकड़े गए और फरार आरोपियों की मुंबई पुलिस ने जो कड़ियां जोड़ी हैं. वो फिलहाल यही इशारा कर रही हैं कि इसके पीछे लॉरेंस गैंग का हाथ हो सकता है. मुंबई पुलिस को ऐसा क्यों लगता है आइए समझते हैं. असल में बाबा सिद्दीकी के कत्ल की साजिश बुनने और उसे अंजाम देने के लिए पुलिस ने अब तक कुल 6 लोगों की शिनाख्त की है. इनके नाम गुरमैल सिंह, शिवकुमार गौतम, धर्मराज कश्यप, जीशान अख्तर, परवीन लोनकार और शुभम उर्फ शुबु लोनकार. इनमें से तीन गुरमैल सिंह, धर्मराज कश्यप और परवीन लोनकार फिलहाल पुलिस के कब्जे में हैं, जबकि बाकी तीन यानि जीशान, शिवकुमार और शुभम फरार हैं. पुलिस उनकी तलाश कर रही है.
पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में जो कहानी निकलकर सामने आई वो कुछ यूं है कि पंजाब के जालंधर के शकर गांव का रहने वाला जीशान अख्तर मर्डर और डकैती के केस में पटियाला जेल में बंद था. उसका अपना एक गैंग है. वो साल 2022 से जून 2024 तक पटियाला जेल में ही बंद था. यहीं उसकी मुलाकात लॉरेंस गैंग के कुछ गुर्गों से हुई. इसके अलावा जेल में रहने के दौरान ही उसकी मुलाकात गुरमैल सिंह से भी हुई. जो अपने बड़े भाई के कत्ल के इल्जाम में सजा काट रहा था. इसी साल 7 जून को जीशान जमानत पर जेल से बाहर आ गया. इसी दौरान गुरमैल भी जमानत पर जेल से बाहर आ चुका था. जीशान ने गुरमैल के घर कैथल जाकर उससे मुलाकात किया. इसके बाद मुंबई चला गया.
मुंबई पुलिस के मुताबिक पटियाला जेल में रहने के दौरान ही लॉरेंस गैंग के गुर्गों से बातचीत के बाद जीशान अख्तर को उसका मैसेज मिला. उसे टारगेट का नाम बताया गया. यह टारगेट कोई और नहीं बाबा सिद्दीकी ही थे. अब जीशान को शूटरों का इंतजाम करना था. लॉरेंस गैंग के काम करने के तरीके को देखते हुए. ऐसे शूटर चुने जाने थे जिनका कोई बड़ा क्रिमिनल बैंकग्राउंड ना हो और ना ही वो वॉटेंड हो. इसके बाद जीशान पुणे पहुंचा. वहां वो शुभम उर्फ शुबु लोनकार से मिला, जो कि पहले से ही लॉरेंस गैंग के लिए काम करता रहा है. पुणे में उसकी अपनी डेरी और तबेला है. उसके बराबर में एक कबाड़ का गोदाम है. उसी गोदाम में यूपी के बहराइच से आए धर्मराज कश्यप और शिवकुमार काम करते थे.
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