
सरकारी नौकरी में मेरिट वालों के पास सबसे कम जगह, इन्हें मिल रहा फायदा, Bangladesh में क्यों आरक्षण पर मचा हल्ला?
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हजारों स्टूडेंट्स ने ढाका के मुख्य रास्तों पर जाम लगा दिया. यहां तक कि राजधानी को बाकी शहरों से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे को भी बंद कर दिया था. वे आरक्षण को कम या खत्म करने की मांग कर रहे थे. आखिरकार बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरी में कोटा पर अस्थाई रोक लगा दी. पिछले 6 सालों से रिजर्वेशन बंद था.
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण में सुधार को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं. हाल में ढाका की सड़कों पर हजारों छात्र उतर आए और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी देने की मांग की. आंदोलन हिंसक न हो जाए, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल महीनेभर के लिए आरक्षण पर रोक लगा दी है.
आजादी के साथ ही कोटा सिस्टम शुरू
रिजर्वेशन पर तलवारें हमारे देश ही नहीं, पड़ोसी मुल्कों में भी खिंची रहती है. बांग्लादेश इसका ताजा उदाहरण है. यहां सरकारी जॉब में एक तिहाई पद उन लोगों के लिए है, जिनके पुरखों ने साल 1971 में हुए आजादी के आंदोलन में भाग लिया था. यहां बता दें कि पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से से टूटकर बांग्लादेश बना, जो बंगालीभाषी मुस्लिमों का था. इसके बाद पुराने कोटा सिस्टम में कई बदलाव किए गए.
आजादी के हीरो या उनके परिवारों को 30 प्रतिशत कोटा
सबसे ज्यादा आरक्षण सिविल सर्विस में बैठने वालों के लिए मिला. साल 1972 में यानी आजाद मुल्क बनने के तुरंत बाद वहां की सरकार ने बांग्लादेश सिविल सर्विस की शुरुआत की. शुरुआत में इसकी 30 फीसदी नौकरियां फ्रीडम फाइटर्स के परिवार के लिए थी. 10 प्रतिशत उन महिलाओं के लिए थी, जिनपर आजादी की लड़ाई में असर पड़ा था. 40 फीसदी अलग-अलग जिलों के लिए आरक्षित था. अब बाकी रहा 20 प्रतिशत. तो इतनी ही सीटें मेरिट वालों के लिए थीं.

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