
सपा का 'घोसी मॉडल'... PDA के बाद क्षत्रिय वोटों के लिए अखिलेश का सामाजिक एकीकरण सम्मेलन, जानें रणनीति
AajTak
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए पीडीए का नारा दिया था. पीडीए के बाद अब सपा ने क्षत्रिय वोटों के लिए सामाजिक एकीकरण सम्मेलन आयोजित करने का ऐलान किया है. इस सम्मेलन के पीछे अखिलेश यादव की रणनीति क्या है?
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को हराने के लिए नया फॉर्मूला दिया था. अखिलेश ने कहा था कि एनडीए को पीडीए हरा सकता है. पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक. पीडीए के बाद अब सपा की नजर क्षत्रिय वोट पर है.
ये भी पढ़ें- 2024 में फिरोजाबाद से अक्षय यादव ठोकेंगे चुनावी ताल! चाचा शिवपाल ने किया ऐलान
सपा ने क्षत्रिय वोट के लिए सामाजिक एकीकरण सम्मेलन आयोजित करने का ऐलान किया है. 3 सितंबर को लखीमपुर से इस सम्मेलन की शुरुआत होगी जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल होंगे. सपा का प्लान लखीमपुर के बाद बांदा और प्रतापगढ़ में भी सामाजिक एकीकरण सम्मेलन के आयोजन का है. अब अहम सवाल ये है कि इस सम्मेलन के पीछे अखिलेश यादव की रणनीति क्या है?
क्या है अखिलेश की रणनीति
वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर श्रीराम त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव सपा को मुस्लिम-यादव की पार्टी वाली इमेज से बाहर लाने की कोशिश कर रहे हैं. पीडीए हो या अब क्षत्रिय समाज को लेकर सामाजिक एकीकरण सम्मेलन, ये इसी रणनीति का हिस्सा है. दूसरा पहलू ये भी है कि विपक्ष अगर एकजुट होकर लोकसभा चुनाव लड़ता है तो लड़ाई NDA बनाम I.N.D.I.A. यानी बाइपोलर हो जाएगी. बाइपोलर कॉन्टेस्ट की स्थिति में जीत सुनिश्चित करने के लिए करीब 50 फीसदी वोट चाहिए होंगे. अखिलेश इस वजह से भी सपा का वोट बेस बढ़ाने की कोशिश में हैं.
सपा से छिटका राजपूत वोट

अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस,इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है. मेन टारगेट न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नंटाज, इस्फाहान), IRGC कमांडर्स, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज और स्ट्रैटेजिक बेस हैं. ट्रंप ने प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर धमकी दी है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. अरब देश युद्ध से डर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.







