
सनी देओल और OTT... बड़े पर्दे के सुपरस्टार का डाउनग्रेड या जनता की बनाई जबरदस्त जोड़ी?
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‘बॉर्डर 2’ की ब्लॉकबस्टर कामयाबी के बीच सनी देओल का ओटीटी डेब्यू कुछ लोगों को खटक रहा है. लेकिन 2026 के ओटीटी ट्रेंड बता रहे हैं कि प्लेटफॉर्म्स अब मास ऑडियंस चाहते हैं. ऐसे में सनी देओल का आना उनके स्टारडम का डाउनग्रेड नहीं, बल्कि ओटीटी का अपग्रेड है.
एक तरफ सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ थिएटर्स में जमकर भीड़ जुटा रही है. तो दूसरी तरफ उन्होंने धमाका करने का नया प्लेटफॉर्म भी चुन लिया है. नेटफ्लिक्स हाल ही में 2026 के लिए अपना लाइन-अप रिवील कर चुका है और इसमें सनी देओल की ओटीटी डेब्यू फिल्म ‘इक्का’ भी है. डबल एक्साइटमेंट वाली बात ये है कि सनी के साथ फिल्म में अक्षय खन्ना भी हैं. ‘इक्का’ की अनाउंसमेंट में कास्टिंग को लेकर तो जनता बहुत एक्साइटेड दिखी. मगर सनी के ओटीटी पर आने को लेकर जनता नाराज़ भी दिखी.
सनी के ओटीटी पर आने से क्यों नाराज़ है पब्लिक? 2010 के दशक में बड़े पर्दे से गायब लगने लगे सनी देओल ने ‘गदर 2’, ‘जाट’ और ‘बॉर्डर 2’ की कामयाबी से फिर अपना खोया हुआ स्टारडम वापस पा लिया है. दर्शक सनी का ऑरा फिर से डिस्कवर कर रहे हैं और वो फिर से बड़े पर्दे पर एक तगड़ी पावर लगने लगे हैं. सनी के ओटीटी पर आने की नाराज़गी इस बात में छुपी है कि ओटीटी को टीवी की रिप्लेसमेंट की तरह देखा जाता है. जबकि थिएटर्स यानी बड़े पर्दे को स्टारडम का असली मंच माना जाता है.
जनता का मानना है कि सनी देओल का कद ओटीटी के लिहाज़ से बहुत बड़ा है. लेकिन 2026 में यह फर्क न सिर्फ धुंधला पड़ चुका है, बल्कि कई मामलों में उलट भी चुका है. अब ओटीटी खुद भी एक स्टार-मेकर प्लेटफॉर्म है. जयदीप अहलावत, प्रतीक गांधी, विजय वर्मा जैसे एक्टर्स को ओटीटी ने ही स्टार बनाया है. लेकिन अब प्लेटफॉर्म सिर्फ शहरी दर्शकों, युवाओं और लिमिटेड ऑडियंस तक सीमित नहीं रहना चाहते. नेटफ्लिक्स और बाकी प्लेटफॉर्म्स की प्रोग्रामिंग बता रही है कि वे बड़े दर्शक वर्ग में जगह बनाना चाहते हैं. उन्हें मास ऑडियंस चाहिए और इस शिफ्ट को पूरा करने के लिए सनी देओल एक परफेक्ट स्टार हैं.
सबसे फैमिली-फ्रेंडली स्टार— सनी देओल सनी देओल का स्टारडम, 90s में हो या आज, किसी एक ऑडियंस ग्रुप के भरोसे नहीं खड़ा हुआ. इसीलिए जब इंडियन सिनेमा में मल्टीप्लेक्स का दौर आया और फिल्मों का फ्लेवर शहरी होने लगा तो दोनों चीजें एक साथ हुईं— थिएटर्स से देसी ऑडियंस गायब होने लगी और उनका हीरो सनी देओल भी बड़े पर्दे से गायब होता चला गया. पिछले कुछ सालों में मास फिल्मों से इन दर्शकों की थिएटर वापसी ही OG मास हीरो सनी देओल की वापसी का कारण बनी है.
ओटीटी भी अब इसी मास ऑडियंस की तरफ लौट रहा है और उनके लिविंग रूम में लगे टीवी पर कब्ज़ा करना चाहता है. और सनी से बड़ा लिविंग रूम स्टार बॉलीवुड में शायद ही कोई हो. उनकी फिल्मों की असली ताकत टीवी पर ही दिखी है. बॉक्स ऑफिस पर कमजोर साबित हुईं उनकी फिल्में टीवी पर कल्ट बन गईं. संडे की दोपहर कितने ही परिवारों ने सनी देओल की फिल्मों के नाम की है. उनकी फिल्मों की रिपीट वैल्यू कमाल की रही है.
सनी की ऑन-स्क्रीन इमेज में एक नैतिक स्पष्टता है. नशा करता हीरो, गैर-ज़रूरी हिंसा, किसिंग सीन्स या बेडरूम सीक्वेंस, और अपनी मनमानी के लिए पेरेंट्स से बगावत— ऐसी कोई भी चीज़ जो एक परिवार के लिविंग रूम में असहजता पैदा करे, सनी की फिल्मों में नहीं मिलती. मिलेगी भी तो ऐसी फिल्मों में जो बहुत पॉपुलर नहीं रहीं. सनी का हीरोइज़्म, कॉमिक टाइमिंग और दमदार इमोशनल परफॉर्मेंस उन्हें जनता का हीरो बनाता है. ये क्वालिटीज उस नए लक्ष्य से मेल खाती हैं, जिसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स लगातार साधने की कोशिश में हैं.













