
'संसाधन और हथियार हों, पर मनोबल न हो तो...', NSA अजित डोभाल ने युवाओं को समझाई नेतृत्व की ताकत
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भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने युवाओं से इतिहास से प्रेरणा लेकर अपने मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों पर आधारित एक सशक्त भारत के निर्माण का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि अतीत में सुरक्षा खतरों की अनदेखी से देश को सबक मिला, जिसे भूलना आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी.
विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने युवाओं को राष्ट्र की इच्छाशक्ति और नेतृत्व की ताकत का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति को बढ़ाया जा सकता है और वही इच्छाशक्ति आगे चलकर राष्ट्रीय शक्ति बनती है. डोभाल ने कहा कि युद्ध असल में किसी राष्ट्र की इच्छा शक्ति के लिए लड़े जाते हैं. उन्होंने कहा, 'युद्ध किसी को मारने या विनाश का आनंद लेने के लिए नहीं लड़े जाते, बल्कि किसी देश का मनोबल तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं ताकि वह दूसरे की शर्तों पर झुक जाए.'
उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जो भी युद्ध और संघर्ष हो रहे हैं, वे इसलिए हैं क्योंकि कुछ देश अपनी इच्छा दूसरों पर थोपना चाहते हैं. यदि कोई देश इतना शक्तिशाली हो कि उसका कोई विरोध न कर सके, तो वह हमेशा स्वतंत्र बना रहता है. लेकिन यदि किसी देश के पास संसाधन और हथियार तो हों, पर मनोबल न हो, तो सब कुछ बेकार हो जाता है. इसके लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है. अजित डोभाल ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि देश आज सौभाग्यशाली है कि उसके पास ऐसा नेतृत्व है, जिसने बीते 10 वर्षों में भारत को प्रगति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व की प्रतिबद्धता, मेहनत और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा है.
हमारे मंदिरों को लूटा गया, हम मूक दर्शक बने रहे
उन्होंने कहा कि भारत की आजादी बहुत बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है, जिसमें पीढ़ियों तक भारतीयों को अपमान, विनाश और भारी नुकसान झेलना पड़ा. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इतिहास से प्रेरणा लें, उससे शक्ति प्राप्त करें और अपने मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों पर आधारित एक सशक्त और महान भारत के निर्माण के लिए काम करें. अजित डोभाल ने कहा, 'आज का स्वतंत्र भारत हमेशा इतना स्वतंत्र नहीं था जितना आज दिखाई देता है. हमारे पूर्वजों ने इसके लिए असाधारण बलिदान दिए. उन्होंने गहरे अपमान और बेबसी के दौर झेले. कई लोगों को फांसी पर चढ़ना पड़ा. हमारे गांव जला दिए गए, हमारी सभ्यता को नष्ट किया गया और हमारे मंदिरों को लूटा गया, जबकि हम मूक दर्शक बने रहे.'
हर युवा के भीतर भारत के लिए आग होनी चाहिए

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