
संजय राउत ने दिये संकेत- BMC चुनाव अकेले लड़ सकती है उद्धव की शिवसेना
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संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पार्लियामेंट परिसर में हुए धक्काकांड को लेकर सियासत जारी है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगा रही हैं. इस बीच शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत का बयान आया है.
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पार्लियामेंट परिसर में हुए धक्काकांड को लेकर सियासत जारी है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगा रही हैं. इस बीच शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत का बयान आया है. राउत ने धक्काकांड के बाद चोटिल सांसदों को लेकर कटाक्ष किया है. संजय राउत ने कहा कि भाजपा सांसद अस्पताल में लेटकर कितनी अच्छी एक्टिंग करते हैं. सांसदों ने कितना अच्छा परफॉरमेंस दिया है. संजय राउत ने यह भी संकेत दिया है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना बीएमसी का चुनाव अकेले लड़ सकती है.
'वे फर्जी मामले दर्ज करते हैं' कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मामलों (भाजपा की शिकायत और कांग्रेस की शिकायत) को अपराध शाखा को सौंपे जाने पर यूबीटी नेता ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी सरकार इस मामले को ED और FBI को दे सकती है, क्योंकि वे कुछ भी कर सकते हैं, वे फर्जी मामले दर्ज करते हैं.
'शिवसेना को मुंबई नगर निगम का चुनाव लड़ना चाहिए' यूबीटी नेता संजय राउत ने कहा, पार्टी कार्यकर्ताओं की मांग है कि शिवसेना को मुंबई नगर निगम (BMC) का चुनाव अपने दम पर लड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद उद्धव ठाकरे फैसला लेंगे. इसका मतलब यह नहीं कि महाविकास अघाड़ी टूट गयी है. इससे पहले जब हम बीजेपी के साथ थे तब भी हम अलग-अलग चुनाव लड़ चुके हैं.
देवेंद्र फडणवीस पर निशाना संजय राउत ने अर्बन नक्सल वाले बयान पर सीएम देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस झूट बोलते हैं. मैं कहूं तो अच्छा नहीं लगेगा. लेकिन हाथ में कागज लेकर झूठ बोलना यह फडणवीस की आदत है. उन्होंने शुक्रवार को सदन में झूठ बोला. राउत ने कहा कि वे अर्बन नक्सल की बात करते हैं, लेकिन भारत छोड़ो यात्रा में सभी समाज के लोग शामिल थे. लेकिन इनका कहना है कि काठमांडू में मीटिंग हुई तो यह पीएम का फेल्योर है. यह बस स्टंट बनाने का काम कर रहे हैं.
सांसद राउत ने कहा कि काठमांडू को एक समय पर हिंदू राष्ट्र कहते थे. लेकिन वह अब नेपाल के पास चला गया. चीन ने अलग-अलग जगह कब्जा कर लिया. बांगलादेश में हिंदूओं की जान जा रही है. यह सब लोग खुद को हिंदू बताते हैं. ये सब फर्जी हैं. अगर इनमें दम होता तो वहां जाकर अपना परचम लहराते.
महाराष्ट्र सरकार में क्या हो रहा समझना मुश्किल? महाराष्ट्र को लेकर राउत ने कहा, सरकार में क्या हो रहा है, यह समझना मुश्किल है. सरकार (महायुति सरकार) बन गई है लेकिन अभी तक कोई पोर्टफोलियो आवंटित नहीं किया गया है. कानून और व्यवस्था के बहुत सारे मुद्दे हैं. कौन जवाबदेह है? इतना बहुमत होने के बावजूद इतनी देरी क्यों हो रही है.

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?

जब UGC के नए नियमों के खिलाफ छात्र सड़कों पर विरोध कर रहे थे और ये कह रहे थे कि उन्हें ज़बरदस्ती अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, तब सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है, जिससे छात्रों को राहत मिली है. यह कदम छात्रों के अधिकारों की रक्षा और न्यायसंगत प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय और हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है.







