
शरद पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन पर मुंबई पुलिस सख्त, 107 लोगों पर FIR दर्ज
AajTak
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के चीफ शरद पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने वाले MSRTC के 107 कर्मचारियों के खिलाफ मुंबई के गावदेवी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. इनमें से 23 महिला हैं.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के चीफ शरद पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने वाले महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के 107 कर्मचारियों के खिलाफ मुंबई के गावदेवी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. इनमें से 23 महिला हैं. वहीं, कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद NCP प्रमुख शरद पवार ने कहा कि MSRTC कर्मचारियों को गुमराह किया जा रहा है. एसटी कर्मचारी और हमारा बहुत पुराना रिश्ता है, पिछले 40-50 वर्षों में मैंने उनके साथ कोई सत्र नहीं छोड़ा है. इस बार विरोध को गलत रास्ता दिखाया गया और उसका परिणाम आज की घटना है.
बता दें कि शुक्रवार को राज्य परिवहन कर्मचारियों ने मुंबई में पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था. कर्मचारियों ने सरकार पर वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है. कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सुप्रिया सुले ने उन्हें शांत करने की कोशिश की, लेकिन विरोध जारी रहा.
महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के 100 से अधिक हड़ताली कार्यकर्ताओं ने शरद पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए एनसीपी चीफ के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनके मुद्दों को हल करने के लिए शरद पवार और उनकी पार्टी ने कुछ नहीं किया है. हड़ताली कर्मचारियों ने कहा कि वे MSRTC के राज्य सरकार में विलय की अपनी मांग पर अडिग हैं.
कुछ कर्मचारियों ने पवार के घर की ओर जूते भी फेंके थे
कर्मचारी दोपहर में दक्षिण मुंबई में पवार के आवास 'सिल्वर ओक' पहुंचे और उनके खिलाफ नारेबाजी की. कुछ कर्मचारियों ने जूते भी उनके घर की ओर फेंक दिए. MSRTC के एक आंदोलनकारी कर्मचारी ने कहा कि हड़ताल के दौरान लगभग 120 कर्मचारियों ने आत्महत्या की है. ये आत्महत्या नहीं हैं, बल्कि राज्य नीति की हत्याएं हैं. हम राज्य सरकार के साथ एमएसआरटीसी के विलय की अपनी मांग पर दृढ़ हैं. एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कुछ भी नहीं किया है इस मुद्दे को हल करें.
कर्मचारियों ने ये भी कहा कि हम बंबई उच्च न्यायालय के कल के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन हम राज्य सरकार के साथ मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे, जिसे लोगों ने चुना है. इस निर्वाचित सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया. इस सरकार के चाणक्य शरद पवार भी हमारे नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं. बता दें कि पवार को शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार का अहम नेता माना जाता है. महा विकास अघाड़ी सरकार का गठन नवंबर 2019 में हुआ था.

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में वन तस्करी की शिकायत पर कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम पर फायरिंग का मामला सामने आया है. जब टीम जंगल में छापेमारी कर रही थी, तभी आरोपी ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी. इस घटना से वन विभाग के अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं. मौके पर मौजूद लाइव कैमरों ने पूरी मुठभेड़ रिकॉर्ड कर ली, जिसमें आरोपी का हमला स्पष्ट दिख रहा है.

यादव जी लव स्टोरी फिल्म 27 फरवरी को रिलीज़ होने वाली है. यादव समाज ने साफ चेतावनी दी है कि वे इस फिल्म को किसी भी सिनेमाघर में रिलीज नहीं होने देंगे. इस मामले में संभल में FIR भी दर्ज कराई गई है, जिसमें फिल्म के निर्माता, निर्देशक, तथा मुख्य कलाकारों के नाम भी शामिल हैं. इस विवाद ने फिल्म की रिलीज़ पर सवाल खड़ा कर दिया है. इसमें ऐसा क्या हैं, जो शहर-शहर मचा हुआ है बवाल, देखें.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद बढ़ गया है. अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने योगी सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था. अब तक 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया और हिंदू विरोधी प्रवृत्ति दिखाई है. उन्होंने यह आरोप एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया और इसे तीखे तेवर के साथ प्रस्तुत किया.

हाल में पाकिस्तानी के खिलाड़ियों का एक वीडियो वायरल हुआ , जहां वो कह रहे थे कि उनको ऑस्ट्रेलिया में बर्तन धोने पड़े. इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) के अध्यक्ष तारिक बुगती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन इस मामले में पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों को वीडियो क्यों डिलीट करना पड़ा, इसकी वजह सामने आ गई है.

MP विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को उस समय मर्यादाएं तार-तार हो गईं, जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस ने अपमानजनक मोड़ ले लिया. सदन में इस्तेमाल किए गए असंसदीय शब्दों के कारण न केवल कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, बल्कि मुख्यमंत्री को भी मोर्चा संभालना पड़ा.








