
शपथ, मुलाकात और दावत के बीच दो घंटे ही बचेंगे दफ्तर के लिए, पहले दिन कितने फैसले ले सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप?
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डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी रैली के दौरान कई वादे किए. इनमें से अधिकतर के बारे में उनका दावा है कि वे पहले ही रोज उनपर काम शुरू कर देंगे. इसमें इमिग्रेशन से लेकर एनर्जी तक शामिल है. लेकिन सवाल ये है कि जनवरी में वाइट हाउस आने के बाद पहले दिन उनके पास कितना समय होगा? क्या-क्या औपचारिकताएं होती हैं, जो चौबीस घंटों के भीतर पूरी की जाती हैं? क्या इसके बीच उनके पास ऑर्डर्स पर दस्तखत करने का समय होगा?
अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने शपथ लेने जा रहे हैं. पहले कार्यकाल की तरह ही वे अपने निजी घर से वाइट हाउस शिफ्ट हो जाएंगे. यहीं पर उनका दफ्तर ओपल ऑफिस भी होगा, जहां बैठकर राष्ट्रपति सारे फैसले करते हैं. ट्रंप के वादों की प्लेट में पहले ही दिन से काफी कुछ करने को है. इसमें कई ऐसे वादे भी हैं, जिन्हें पूरा करना अकेले ट्रंप के बस में नहीं. जानिए, डे वन पर वे क्या कर सकते हैं और क्या नहीं.
अमेरिकी राष्ट्रपति बतौर कई सारी औपचारिकताएं हैं, जो ट्रंप को पूरी करनी होंगी. इस दिन की शुरुआत शपथ लेने से होती है. देश के मुख्य न्यायाधीश उन्हें कैपिटल हिल के पास शपथ दिलवाएंगे. इसके बाद इनॉगरल एड्रेस होता है. ये वो भाषण है जिसमें राष्ट्रपति अपने आने वाले कामों का ड्राफ्ट देंगे.
कैपिटल हिल से निकलकर वे पहले एक औपचारिक लंच लेंगे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज समेत सारे बड़े अधिकारी होंगे. भोज में दोपहर लगभग बीत चुकी होती है. इसी समय कैपिटल हिल से लेकर वाइट हाउस तक परेड होती है, ताकि जनता अपने चुने हुए लीडर को देख सके.
परेड के साथ ही ट्रंप वाइट हाउस पहुंचेंगे. वे अपने पहले कार्यकाल में भी यहां रह चुके हैं. ये जगह उनकी परिचित है लेकिन उनके आने से कुछ ही घंटों पहले बाइडेन इसे खाली करेंगे, और उतनी ही देर में इसे नए लीडर के मुताबिक तैयार किया जाएगा. ट्रंप यहां का मुआयना करेंगे और फिर ओपल ऑफिस जा सकते हैं, जो कि उनका दफ्तर होगा.
लगभग दो घंटों में लेने होंगे फैसले

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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