
शंका, आशंका, प्रशंसा... 7 साल बाद चीन जा रहे PM मोदी, पड़ोसी देश की सोशल मीडिया पर क्या चर्चा है?
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चीन के सख्त कंट्रोल वाले मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर लोग प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका की टैरिफ धमकियों के खिलाफ कड़े रुख की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन कई लोग अब भी चाहते हैं कि भारत पूरी तरह से बीजिंग के साथ खड़ा हो.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही चीन के दो दिन के दौरे पर पहुंचे, चीनी सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. कई यूजर्स ने मोदी की अमेरिका के ट्रेड प्रेशन के खिलाफ डटकर खड़े होने की तारीफ की, जबकि कुछ ने भारत पर शक जताया और चीन से गहरे सहयोग की मांग की.
चीन के कड़े नियंत्रण वाले सरकारी और सोशल मीडिया से यही दिखता है कि भारत के लिए चीन और अमेरिका के साथ रिश्तों में संतुलन बनाना आसान नहीं है. अमेरिका, नई दिल्ली को अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति का अहम हिस्सा मानता है.
असल में चीन में असली जनता की राय पकड़ना मुश्किल है, क्योंकि वहां 'ग्रेट फायरवॉल' इंटरनेट पर कड़ा सेंसरशिप लागू करता है. इसी वजह से ट्रेंड समझने के लिए इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने वीबो और डोयिन (चीन का टिक-टॉक) पर नजर डाली.
मोदी की तारीफ
सोशल मीडिया पर मोदी के इस दौरे को लेकर उत्साह साफ दिखा. एक लोकप्रिय वीबो पोस्ट में लिखा था- 'भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात साल बाद चीन यात्रा ने बहुत ध्यान खींचा है. चीन-भारत रिश्तों में साफ तौर पर नया मोड़ आया है.'

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.








