
वायरल हो रही 87 साल की बाइकर दादी! गाड़ी चलाने का अंदाज देख हर कोई हो रहा फैन
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अहमदाबाद की दो अस्सी साल की बहनों ने साइडकार वाले स्कूटर पर शहर की सड़कों पर फर्राटा भरते हुए 'बाइकर दादियों' के रूप में सबका दिल जीत लिया है. अहमदाबाद के व्यस्त ट्रैफिक में सहजता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती हैं और रास्ते खुशी के पल बिताती हैं.
उम्र भले ही इंसान की रफ्तार धीमी कर दे, लेकिन अगर जीने का जुनून हो तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं अहमदाबाद की 87 वर्षीय मंदाकिनी शाह, जिन्होंने पूरे देश का दिल जीत लिया है. हाल ही में उन्होंने अपनी रोमांच भरी जिंदगी, अपनी छोटी बहन उषा के साथ खास रिश्ता और उस स्कूटर के बारे में बात की, जिस पर दोनों आज भी पूरे शहर में घूमती हैं. मंदाकिनी कहती हैं कि उन्हें अपनी बहन उषा के साथ स्कूटर पर निकलना बहुत पसंद है. जब लोग उनसे पूछते हैं कि 87 साल की उम्र में स्कूटर क्यों चलाती हैं, तो वह मुस्कुराकर कहती हैं - "क्यों नहीं?" उन्होंने 62 साल की उम्र में स्कूटर चलाना सीखा था और हमेशा से अपनी आजादी को बेहद महत्व दिया है.
बचपन से संभाली घर की जिम्मेदारी छह भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण उन्होंने बचपन से ही जिम्मेदारियां संभालीं. उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और आजादी के बाद अपना कारोबार शुरू करना चाहते थे, लेकिन पैसों की कमी के कारण नहीं कर पाए. घर में अक्सर आर्थिक तंगी रहती थी. अपनी मां को हर दिन मेहनत करते देखकर मंदाकिनी को आत्मनिर्भर होने और खुद के पैरों पर खड़े होने का महत्व समझ आया.
PTI की रिपोर्ट के अनुसार-अहमदाबाद की दो अस्सी साल की बहनों ने साइडकार वाले स्कूटर पर शहर की सड़कों पर फर्राटा भरते हुए 'बाइकर दादियों' के रूप में सबका दिल जीत लिया है. 87 वर्षीय मंदाकिनी शाह अपनी छोटी बहन के साथ मस्ती भरी सवारी का आनंद लेती हैं, अहमदाबाद के व्यस्त ट्रैफ़िक में सहजता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती हैं और रास्ते में आनंद के पल बिताती हैं.
62 साल की उम्र में सीखा स्कूटर चलाना जब लोग पूछते हैं कि वह 87 साल की उम्र में स्कूटर क्यों चलाती हैं, तो वह बस यही पूछती हैं, "क्यों नहीं?" उन्होंने 62 साल की उम्र में स्कूटर चलाना सीखा और हमेशा अपनी आजादी को महत्व दिया है. छह भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते, उन्होंने बहुत कम उम्र में ही ज़िम्मेदारी सीख ली थी. उनके पिता, जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे, आज़ादी के बाद एक व्यवसाय शुरू करना चाहते थे, लेकिन पैसों की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाए. मंदाकिनी बताती हैं कि उनके पास हमेशा पैसे की कमी रहती थी, और अपनी मां को हर दिन कड़ी मेहनत करते देखकर उन्हें आत्मविश्वास और अपने पैरों पर खड़े होने का महत्व समझ आया.
बाइकर दादी ने अपने इंस्टाग्राम (biker.dadi) पर बताया कि “मेरा नाम मंदाकिनी शाह है, और 87 साल की उम्र में भी मुझे अपनी छोटी बहन उषा और अपने भरोसेमंद स्कूटर के साथ रोमांचक यात्राओं पर जाना बहुत पसंद है! अहमदाबाद में पली-बढ़ी हम पांच बहनें और एक भाई थे. मैं सबसे बड़ी थी, इसलिए जीवन ने मुझे बचपन से ही जिम्मेदारी का मतलब सिखा दिया था. मेरे पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे. स्वतंत्रता के बाद, उनका सपना एक व्यवसाय शुरू करने का था... लेकिन हमारे पास इसके लिए पर्याप्त धन नहीं था. पैसों की हमेशा कमी रहती थी. इसलिए मां ने हमारा पालन-पोषण किया, और उन्हें हर दिन संघर्ष करते हुए देखकर, मैंने यह सीखा कि मुझे अपने पैरों पर खड़ा होना है.
मैं कॉलेज नहीं जा सकी. मैंने स्कूल खत्म करते ही काम शुरू कर दिया था. 16 साल की उम्र में, मैं एक बाल मंदिर में मोंटेसरी शिक्षिका बन गई. मुझे अंग्रेजी के बहुत से शब्द नहीं आते थे, लेकिन मैं जानती थी कि मुझे काम करना है. बाद में, मैं सामाजिक कल्याण परियोजनाओं से जुड़ गई - महिला मंडलों से मिलना, पंचायत चर्चाओं में भाग लेना, महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में बताना. उन धूल भरी सड़कों की यात्राओं और अंतहीन चाय की बैठकों के बीच, मैंने स्कूटर चलाना सीखा.” पहले मैंने मोपेड ली... फिर जीप ली... और अंत में, मैंने एक सेकंड हैंड स्कूटर खरीदा.

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