
वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हिन्दू और मुस्लिम पक्ष क्यों बता रहे हैं अपनी-अपनी जीत, समझें अदालत का फैसला
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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा देते हुए कहा है कि वो अगली सुनवाई तक 'वक्फ बाय डीड' और 'वक्फ बाय यूजर' की संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं करेगी. यानी कि जो संपत्तियां वक्फ बाय यूजर के जरिये वक्फ बोर्ड को मिली हैं, वक्फ बोर्ड के नाम रजिस्टर्ड हैं, वक्फ बोर्ड के नाम से गजेटेड हैं उसे डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा.
वक्फ संशोधन कानून 2025 पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए 7 दिनों का समय दिया है. लेकिन वक्फ संशोधन कानून 2025 पर किसी तरह का रोक नहीं लगाया है. इन 7 दिनों तक वक्फ बोर्ड, वक्फ परिषद में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी. केंद्र सरकार ने मामले की सुनवाई होने तक वक्फ बोर्ड, वक्फ परिषद में किसी भी गैर मुस्लिम की नियुक्ति नहीं करने का भरोसा दिया है.
इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक 'वक्फ बाय यूजर' या 'वक्फ बाय डीड' संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा. यानी कि इसे वक्फ से नहीं लिया जाएगा.
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का यह आश्वासन भी दर्ज किया कि इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पांच दिन के भीतर केंद्र के जवाब पर जवाब दाखिल कर सकते हैं, जिसके बाद मामले को अंतरिम आदेश के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा. अब इस मामले की सुनवाई 5 मई को होगी.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अगली सुनवाई तक "वक्फ बाय डीड" और "वक्फ बाय यूजर" संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं करेगी.
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