
'लोकतंत्र को कलंकित किया...', लोकसभा में कागज फाड़ उछालने के लिए विपक्ष पर बरसे शिवराज, की निंदा
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ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान लोकसभा में जब वीबी-जी राम जी योजना पर चर्चा का जवाब दे रहे थे, विपक्षी सदस्यों ने कागज फाड़कर उछाले. शिवराज ने इसे लोकतंत्र को कलंकित, संसदीय मर्यादा को तार-तार करने वाला कृत्य बताते हुए इसकी निंदा की है.
केंद्र सरकार संसद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) बिल लेकर आई है. लोकसभा में आधी रात तक चर्चा के बाद गुरुवार को कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा का जवाब दिया. यह बिल विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा से पारित भी हो गया है.
विपक्षी दल मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी बिल लाए जाने को बापू का अपमान बता रहे हैं. वहीं, इसे लेकर अब शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष रखा है. शिवराज ने कहा कि इस बिल पर चर्चा कल (17 दिसंबर को) शुरू हुई. हमने पूरी गंभीरता के साथ माननीय सांसदों की बातें सुनीं, क्योंकि चर्चा ही लोकतंत्र का प्राण है.
उन्होंने अपने संबोधन के दौरान स्पीकर के आसन के सामने कागज फाड़कर उछाले जाने को अमर्यादित आचरण बताया और इसकी निंदा करते हुए कहा कि क्या ये बापू के बापू का अपमान नहीं है. शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में विपक्षी दलों के आचरण की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष ने लोकतंत्र को कलंकित कर संसदीय परंपराओं को तार-तार कर दिया है. लोकतंत्र को 'गुंडाराज' में बदल दिया है.
उन्होंने कहा कि गरीब कल्याण बीजेपी का संकल्प है. पीएम मोदी के नेतृत्व में एक नहीं, अनेकों योजनाएं लगातार गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने का काम कर रही हैं. इसलिए 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं. शिवराज ने कहा कि विकसित भारत के लिए रोजगार और विकसित गांव... ये मोदी जी का संकल्प है.
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उन्होंने कहा कि मनरेगा में रोजगार के लिए जहां सौ दिन के रोजगार की गारंटी थी, वीबी-जी राम जी योजना में उसे बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है. शिवराज सिंह चौहान ने वीबी-जी राम जी योजना की आवश्यकता पर भी बात की और कहा कि मनरेगा में पैसों की लूट खत्म करनी थी. अगर कोई बेहतर योजना बनती है, तो उसमें आपत्ति क्या है. क्या एक जगह गड्ढा खोदकर दूसरी जगह गड्ढा खोद दो, बस यही होना चाहिए?

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