
गगनदीप रंधावा सुसाइड केस: 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भुल्लर, CBI जांच की मांग तेज
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गगनदीप रंधावा सुसाइड केस में पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को कोर्ट ने पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है. आत्महत्या से पहले वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों ने इस केस को सियासी और कानूनी तौर पर बेहद संवेदनशील बना दिया है.
पंजाब के बहुचर्चित रंधावा सुसाइड केस में पुलिस जांच ने तेज रफ्तार पकड़ ली है. इस मामले में आरोपी पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को मंगलवार को अमृतसर कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने भुल्लर को पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है. पुलिस ने सात दिन की रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने ना मंजूर कर दिया.
सोमवार को गिरफ्तारी के बाद लालजीत सिंह भुल्लर को अमृतसर में CIA स्टाफ पुलिस स्टेशन लाया गया था. इस दौरान पुलिस ने सख्त सुरक्षा के बीच किसी को भी थाने के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी. भुल्लर को पुलिस ने गोबिंदगढ़ के मंडी से गिरफ्तार किया था. उस वक्त वो कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी कर रहे थे.
यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया, जब पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने एक वीडियो बनाकर लालजीत सिंह भुल्लर पर गंभीर आरोप लगाए थे. सुसाइ़ड वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर दबाव बनाया, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई.
इसके बाद भुल्लर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसमें आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल हैं. इस मामले में CBI जांच की मांग पर भी सियासत तेज हो गई है. पीड़ित परिवार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है.
हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा है कि राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच करने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. यह भी बताया कि इस मामले की जांच के लिए चीफ सेक्रेटरी स्तर की कमेटी बनाई जाएगी. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद यह मामला गरमा गया.
सोमवार को संसद में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यदि पंजाब के सांसद औपचारिक अनुरोध करते हैं, तो CBI जांच पर विचार किया जा सकता है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भगवंत मान ने दोहराया कि पंजाब पुलिस पूरी तरह सक्षम है और निष्पक्ष जांच करेगी. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी को बचाने का काम नहीं करती.

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