
लॉन्ग रेंज टारगेट, सटीक निशाना और दहशत में दुश्मन... क्या होती है रॉकेट फोर्स जिसकी आर्मी चीफ ने बताई जरूरत
AajTak
रॉकेट फोर्स ऐसे एडवांस्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हथियारों को मैनेज करता है जो गाइडेड सिस्टम से दुश्मन के बेस, जहाजों या एयरक्राफ्ट जैसे दूर के टारगेट पर सटीक निशाना लगाते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि काफी दूर से ही दुश्मन के एयरबेस, अड्डे या कमांड सेंटर को ध्वस्त किया जा सकता है. रॉकेट फोर्स दुश्मन के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरोध का काम करता है.
भारत के आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि देश को मिसाइल फोर्स की जरूरत है. उन्होंने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज आप देखेंगे कि रॉकेट और मिसाइलें एक-दूसरे से जुड़ गई हैं क्योंकि अगर हम कोई असर डालना चाहते हैं, तो रॉकेट और मिसाइलें दोनों ही ऐसा कर सकती हैं. हम एक रॉकेट मिसाइल फोर्स बनाने की सोच रहे हैं क्योंकि, जैसा कि आप जानते हैं, पाकिस्तान ने एक रॉकेट फोर्स बनाई है, और चीन ने भी ऐसी ही एक फोर्स बनाई है.
आर्मी चीफ ने कहा कि यह समय की जरूरत है कि हम भी ऐसी ही एक फोर्स बनाएं.
सवाल है कि रॉकेट फोर्स क्या होता है और आधुनिक वॉरफेयर में इसकी क्यों जरूरत है?
रॉकेट फोर्स किसी भी सेना की एक स्पेशल यूनिट होती है. जो लंबी दूरी की मिसाइलों और रॉकेट हथियारों का संचालन, नियंत्रण और हमलों के लिए इस्तेमाल की जाती है. सरल शब्दों में, यह दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों जैसे कमांड सेंटर, हवाई अड्डे या बुनियादी ढांचे पर सटीक और तेज हमले करने का काम करती है. सबसे अहम बात यह है कि रॉकेट फोर्स या मिसाइल फोर्स में सेना को हमला करने के लिए फिजीकली रणभूमि में मौजूद नहीं होना पड़ता है.
बल्कि आर्मी इंजीनियर अपने कमांड सेंटर से ही दुश्मन के ठिकाने को नेस्तानाबूद कर सकता है. रॉकेट फोर्स दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरफील्ड और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे दुश्मन के अहम ठिकानों पर सटीक हमले करने के लिए लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल चलाने का काम करती है. आसान शब्दों में कहें तो, यह जमीनी सैनिकों को खतरे में डाले बिना, तेजी से और दूर से हमला करने की ताकत देने के लिए रॉकेट आर्टिलरी और मिसाइल सिस्टम को एक ही कमांड के तहत लाती है.
रॉकेट या मिसाइल फोर्स ऐसे एडवांस्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हथियारों को मैनेज करता है जो गाइडेड सिस्टम- जैसे रडार, इन्फ्रारेड, या GPS—का इस्तेमाल करके दुश्मन के बेस, जहाजों या एयरक्राफ्ट जैसे दूर के टारगेट पर सटीक निशाना लगाते हैं.

48 घंटे, 9000 पुलिसकर्मी और 4299 जगहों पर रेड... गैंगस्टर्स के खिलाफ पुलिस ने चलाया ऑपरेशन गैंग बस्ट
दिल्ली पुलिस ने राजधानी में अपराधियों के खिलाफ 48 घंटे तक ऑपरेशन गैंग बस्ट चलाया. इस दौरान 850 से ज्यादा बदमाश गिरफ्तार किए गए, लेकिन इस कार्रवाई के 24 घंटे के भीतर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने फायरिंग कर पुलिस को खुली चुनौती दे डाली. पढ़ें पूरी कहानी.

संभल में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विश्लेषक आशुतोष ने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए हैं. उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को वैधानिक माना जा सकता है, लेकिन जब इसे बुलडोजर ब्रांड बनाकर पेश किया जाता है तो यह प्रशासनिक कार्रवाई से अधिक एक राजनीतिक संदेश बन जाता है. आशुतोष ने चेतावनी दी कि यदि इसे केवल कानून व्यवस्था के नाम पर टारगेट कार्रवाई के रूप में देखा जाएगा तो इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है.

उद्धव ठाकरे अब राज ठाकरे के साथ मिलकर बाल ठाकरे की खोई विरासत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. बीएमसी चुनाव से पहले मराठी मानुस को मुद्दा बनाने की कोशिश है, जिसमें बीजेपी को निशाना बनाने के लिए तमिल नेता के. अन्नामलाई को बहाना बनाया जा रहा है. लेकिन, यह मुद्दा वैसा जोर नहीं पकड़ रहा है जैसा बाल ठाकरे के दौर में हुआ था.

गृह मंत्रालय ने सीनियर सिटीजन के लिए एडवाइजरी जारी की है. I4C ने बताया कि साल 2024 के मुकाबले 2025 में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है. सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए पिछले साल ठगी के 7130 करोड़ रुपये बचाए हैं. I4C ने ये भी बताया कि अब साइबर ठग बुजुर्गों को अपना शिकार बना रहे हैं.









