
लिथियम, सोने के 5 ब्लॉक, बेस मेटल... जम्मू-कश्मीर के रियासी में भारत को मिला अरबों का खजाना
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देश के अलग-अलग राज्यों में गोल्ड और लिथियम समेत अन्य खनिजों का भंडार मिला है. इनमें सबसे बड़ा भंडार जम्मू-कश्मीर के रियासी में मिला है, जो कि लिथियम का है. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने 51 ब्लॉकों को राज्य सरकारों और कोयला मंत्रालय को सौंप दिया है.
देश के 11 राज्यों में गोल्ड, लिथियम समेत अन्य खनिजों का भंडार मिला है. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने 51 ब्लॉकों को राज्य सरकारों और कोयला मंत्रालय को सौंप दिया है. जम्मू-कश्मीर के रियासी में मिले लिथियम के इतने बड़े भंडार की यह पहली साइट है, जिसकी GSI ने पहचान की है.
माइंस मंत्रालय के सचिव और CGPB चेयरमैन विवेक भारद्वाज ने बताया मंत्रालय की ओर से 2015 से अबतक राज्य सरकारों को 287 भूगर्भीय दस्तावेज सौंपे गए हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि जीएसआई इस गति को बढ़ाएगी. वहीं बीती 9 फरवरी को GSI ने लिथियम और गोल्ड के अलावा 7897 मिलियन टन के संसाधन वाले कोयला और लिग्नाइट की 17 रिपोर्टें भी कोयला मंत्रालय को सौंपी हैं.
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में 5.9 मिलियन टन के लिथियम अनुमानित संसाधन स्थापित किए हैं. लिथियम का उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल कैमरा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रिचार्बेल बैट्री में किया जाता है. इसके अलावा इसका उपयोग खिलौनों और घड़ियों के लिए भी किया जाता है. इस समय भारत लिथियम के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर है.
'आत्मनिर्भर भारत के लिए खनिजों का पता लगाना महत्वपूर्ण'
माइंस सेक्रेटरी विवेक भारद्वाज ने बताया कि देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के इतने बड़े भंडार की खोज की गई है. उन्होंने कहा कि चाहे मोबाइल फोन हो या सोलर पैनल, महत्वपूर्ण खनिजों की हर जगह आवश्यकता होती है. आत्मनिर्भर बनने के लिए देश के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाना और उन्हें संसाधित करना बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोने का आयात कम किया जाता है तो हम आत्मानिर्भर बन जाएंगे.
51 खनिज ब्लॉकों की रिपोर्ट सौंपी गई

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