
लिथियम के 'खजाने' से EV उद्योग को मिलेगा बढ़ावा, जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी मिलेगा फायदा!
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आजतक से बात करते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार के खनन विभाग के सचिव अमित शर्मा ने कहा कि लिथियम के इतने बड़े भंडार की खोज प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर होगी. उन्होंने कहा कि जीएसआई द्वारा औपचारिकताएं पूरी कर लेने के बाद जल्द ही ई-नीलामी शुरू की जाएगी.
जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में लिथियम का 59 लाख टन का भंडार मिलने के बाद देश में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को काफी बढ़ावा मिलेगा और फोन की लागत कम होगी. केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल कारों से साल 2030 तक छुटकारा पाने का जो लक्ष्य रखा है, इस खोज के साथ उस लक्ष्य को पाने में भी कामयाबी मिलेगी और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा.
आजतक से बात करते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार के खनन विभाग के सचिव अमित शर्मा ने कहा कि लिथियम के इतने बड़े भंडार की खोज प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर होगी. उन्होंने कहा कि जीएसआई द्वारा औपचारिकताएं पूरी कर लेने के बाद जल्द ही ई-नीलामी शुरू की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी. उन्होंने कहा कि ये पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है, जहां लिथियम के बड़े-बड़े भंडार हैं.
भारत के लिए ये खोज बड़ी करामाती साबित हो सकती है. अभी तक भारत में जरूरत का करीब 96 फीसदी लिथियम आयात किया जाता है. इसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है. भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 में लिथियम ऑयन बैटरी के आयात पर 8,984 करोड़ रुपए खर्च किए थे. इसके अगले साल यानी 2021-22 में भारत ने 13,838 करोड़ रुपए की लिथियम आयन बैटरी इम्पोर्ट की थीं.
माइंस सेक्रेटरी ने दी थी जानकारी
माइंस सेक्रेटरी विवेक भारद्वाज ने बताया कि देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के इतने बड़े भंडार की खोज की गई है. उन्होंने कहा कि चाहे मोबाइल फोन हो या सोलर पैनल, महत्वपूर्ण खनिजों की हर जगह आवश्यकता होती है. आत्मनिर्भर बनने के लिए देश के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाना और उन्हें संसाधित करना बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोने का आयात कम किया जाता है तो हम आत्मानिर्भर बन जाएंगे.
भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी ये खोज

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