
रूस में बेकार पड़ा भारत का अरबों रुपया, तेल कंपनियां हुईं परेशान
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भारत की सरकारी तेल कंपनियों की हिस्सेदारी रूस के कई तेल प्रोजेक्ट्स में है. ये कंपनियां लाभ का हिस्सा पहले निकाल लेती थीं लेकिन यूक्रेन पर आक्रमण के कारण रूस पर प्रतिबंध लग गए हैं और भारतीय कंपनियों के पैसे रूस में ही फंस गए हैं. अब कंपनियां उस पैसे के इस्तेमाल के तरीके खोज रही हैं.
भारत की सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों का लाभांश (डिविडेंड इनकम) रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण उसके बैंकों में ही फंस गया है और अब वो चाहती हैं कि उस पैसे का इस्तेमाल रूस से तेल खरीद में हो. मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि भारतीय कंपनियां अपने फंसे पैसे को किसी तरह इस्तेमाल करने के लिए सभी कानूनी विकल्प तलाश रही हैं.
ONGC विदेश (OVL), ऑयल इंडिया (OIL), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (OIC) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) की शाखा भारत पेट्रोरिसोर्सेज को रूस ने डिविडेंड इनकम भुगतान में कुल 60 करोड़ डॉलर (49,83,61,20,000 रुपये) दिए थे जो रूस के बैंक खातों में ही फंसकर रह गए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस के भुगतान चैनलों पर प्रतिबंध लग गया है.
डिविडेंड इनकम वह पैसा होता है किसी कंपनी का शेयर खरीदने पर मिलता है. अगर कंपनी लाभ में है तो उस लाभ का कुछ हिस्सा अपने शेयरधारक को देती है.
अब भारत की कंपनियों ने अपने रूसी साझेदारों के साथ डिविडेंड इनकम का मुद्दा उठाया है. भारत और रूस की सरकारें भी इस मुद्दे पर चर्चा कर रही हैं. रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है. वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में भारत ने रूस से 3.37 अरब डॉलर का तेल खरीदा था.
रूस में फंसे पैसे के इस्तेमाल में कई दिक्कतें
भारत की सरकारी तेल कंपनियों में से एक के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'सबसे व्यावहारिक विकल्प यह होगा कि उस पैसे का उपयोग रूस से खरीदे जाने वाले तेल के कुछ हिस्से के भुगतान के लिए किया जाए. लेकिन इसमें कई वित्तीय और कानूनी दिक्कतें हैं. हम इसका समाधान खोजने की दिशा में काम कर रहे हैं.'

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