
रूस ने पहले दी भारी छूट, अब बेचने लगा इतना महंगा तेल, फिर भी खरीदने को मजबूर क्यों भारत?
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रूस पहले भारत को कच्चे तेल पर भारी डिस्काउंट दे रहा था, लेकिन अब वो भारत को काफी महंगा तेल बेच रहा है. अक्टूबर के लिए जो तेल रूस से भारत आ रहा है, वो पश्चिमी देशों की तरफ से रूसी तेल पर लगाए गए प्राइस कैप से बहुत ऊपर है.
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों को देखते हुए रूस ने भारत को बेहद सस्ते दामों में कच्चा तेल बेचा था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. रॉयटर्स ने जो कैलकुलेशन किए हैं, उससे पता चला है कि रूस भारत को 80 डॉलर प्रति बैरल पर तेल बेच रहा है जो कि पश्चिमी देशों की तरफ से रूसी तेल पर लगाए गए प्राइस कैप से 20 डॉलर अधिक है. पश्चिमी देशों ने रूस के राजस्व पर वार करने के लिए उसके तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल का प्राइस कैप लगा दिया था.
रूसी तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी इसलिए आई है क्योंकि सऊदी अरब और रूस ने मिलकर तेल उत्पादन में भारी कटौती कर दी है. उनके इस कदम का उद्देश्य तेल की कीमतों को बढ़ाना था और हो भी ऐसा ही रहा है.
सऊदी अरब और रूस के साथ-साथ ओपेक+ देशों के तेल उत्पादन में कटौती के बीच जुलाई के महीने से रूस का कच्चा तेल यूराल प्राइस कैप 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बिक रहा है.
व्यापारियों के डेटा और रॉयटर्स के कैलकुलेशन के मुताबिक, अक्टूबर में बाल्टिक बंदरगाह (रूस) से लोड होने वाले यूराल कार्गो की कीमत भारतीय ग्राहकों के लिए गुरुवार को 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब था.
नियमित रूप से रूसी तेल खरीदने वाली एक भारतीय रिफाइनर के एक अधिकारी ने कीमतों में उछाल को लेकर कहा, 'रूस का तेल भंडार कम है और उसने अपने उत्पादन में भी कटौती कर दी है.'
रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट हुआ न्यूनतम

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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