
राहुल गांधी के लिए चुनावी हार से भी बड़ा झटका है लालू यादव का कांग्रेस से सपोर्ट वापस लेना | Opinion
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राहुल गांधी को आखिरकार लालू यादव की नाराजगी भारी पड़ी है. बीस साल तक सोनिया गांधी के सपोर्ट में डटे रहे लालू यादव अब ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं. ममता बनर्जी को INDIA ब्लॉक का नेता बनाने के कल्याण बनर्जी के प्रस्ताव को लालू यादव ने एनडोर्स कर दिया है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति लालू यादव की पार्टी आरजेडी के स्टैंड बदलने का संकेत तो तेजस्वी यादव के बयान से ही मिल गया था. लालू यादव का बयान तो महज उसी बात की पुष्टि कर रहा है.
ममता बनर्जी को INDIA ब्लॉक का नेतृत्व सौंपे जाने के सवाल पर बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का कहना था, हमें ममता बनर्जी के गठबंधन को लीड किये जाने से कोई समस्या नहीं है, लेकिन ये फैसला सर्वसम्मति से होगा - और अब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी वही बात दोहरा रहे हैं.
आरजेडी नेता लालू यादव ने कहा है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेता चुना जाना चाहिये... कांग्रेस के विरोध का कोई मतलब नहीं है... ममता बनर्जी को ही नेता बनाया जाना चाहिये.
बीस साल पहले ये लालू यादव ही थे जो सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर सपोर्ट में खंभे की तरह खड़े हो गये थे. 2004 के आम चुनाव के बाद जब कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए का गठन हुआ, तो बीजेपी नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मुहिम छेड़ दिये थे. बीजेपी को सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने से ऐतराज था, और इसके पीछे उनका विदेशी मूल का होना था.
मुद्दा तो तभी खत्म हो गया जब सोनिया गांधी ने डॉक्टर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया, लेकिन लालू यादव के सपोर्ट को बहुत बड़े एहसान के तौर पर लिया, और अब तक दोनो ही तरफ से ये निभाया जाता रहा है.
राहुल गांधी से नाराज होने के बावजूद लालू यादव हमेशा ही कांग्रेस के सपोर्ट में खड़े रहे, और उसकी एक वजह सोनिया गांधी रही हैं. सोनिया गांधी का ममता बनर्जी भी काफी सम्मान करती रही हैं, लेकिन कांग्रेस और लेफ्ट के पश्चिम बंगाल में गठबंधन और अधीर रंजन चौधरी को पश्चिम बंगाल कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने से उनकी नाराजगी बढ़ती गई - और ममता बनर्जी ने कांग्रेस से दूरी बना ली. पहले जब भी दिल्ली पहुंचतीं, ममता बनर्जी 10, जनपथ जाकर सोनिया गांधी से मिलती जरूर थीं, लेकिन बाद में छोड़ दिया.

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