
राहुल गांधी का गुजरात चुनाव के लिए 'मिशन 2027' बीजेपी की कितनी फिक्र बढ़ाएगा?
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सामने बिहार चुनाव है, लेकिन राहुल गांधी अभी से गुजरात में एक्टिव हो गये हैं. कांग्रेस अधिवेशन के तत्काल बाद राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से खुली बातचीत में इशारा किया है कि गुजरात कांग्रेस में बड़े पैमाने पर फेरबदल होने हैं, और तीन दशक बाद सत्ता में वापसी की कोशिश की जाएगी - लेकिन नंबर देखें तो कांग्रेस के लिए मिशन असंभव सा लगता है.
राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव के नतीजों से बहुत बड़ा सपोर्ट मिला. और, उसी का असर है कि कांग्रेस ने हरियाणा और दिल्ली चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया. झारखंड और महाराष्ट्र में तो कांग्रेस गठबंधन के साथ बनी रही, लेकिन हरियाणा और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ कोई समझौता नहीं हो सका - और अब दिल्ली चुनाव की तरह बिहार में भी कांग्रेस का वैसा ही तेवर नजर आ रहा है.
बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस ने गुजरात पर काम करना शुरू कर दिया है. बिहार में तो चुनाव इसी साल होना है, लेकिन गुजरात में 2027 में, दो साल बाद. कांग्रेस अधिवेशन के बाद तो साफ हो गया है कि राहुल गांधी गुजरात में बिहार से ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं. ये बात तो वैसे भी काफी पहले ही साफ हो गई थी.
लोकसभा में विपक्ष के नेता बनने के बाद राहुल गांधी ने कहा था, आप लिखकर ले लो... आपको इंडिया गठबंधन गुजरात में हराने जा रहा है.
तब से अभी तक बस यही फर्क आया है कि दिल्ली के बाद बिहार में भी इंडिया ब्लॉक टूट की कगार पर दिखाई पड़ रहा है, और गुजरात तक बने रहने की तो कोई संभावना ही नहीं दिखाई देती. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर गुजरात में चुनाव लड़े थे, लेकिन विधानसभा में तो दूर दूर तक ऐसा कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा है.
ये तो अभी से साफ हो गया है कि कांग्रेस अकेले दम पर बीजेपी से मुकाबले के लिए खुद को तैयार कर रही है. और, तैयारियों में कांग्रेस के भीतर भी आमूल चूल परिवर्तन के संकेत दिये गये हैं - सवाल है कि क्या 10 साल बाद कांग्रेस के नये सिरे से एक्टिव होने से बीजेपी के लिए परेशान होने जैसी कोई बात है क्या?
10 साल बाद कांग्रेस को कितनी उम्मीदें

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