
'राम मंदिर को 500 साल पहले गिरा...', अयोध्या पर विदेशी मीडिया को घेरने वाले काश पटेल को ट्रंप बना सकते हैं CIA चीफ!
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अमेरिका के राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रंप एक भारतीय मूल के व्यक्ति को अपनी सरकार में बड़ी जगह दे सकते हैं. ट्रंप के करीबी बताए जाने वाले काश पटेल को सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) का चीफ बनाया जा सकता है. अभी तक काश ही इस पद के लिए शीर्ष दावेदार बताए भी जा रहे हैं.
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के नेता डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर यूनाइटेड स्टेट्स के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस को करारी मात दी है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ट्रंप की सत्ता में वापसी भारतीय मूल के काश पटेल के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. ट्रंप के करीबी बताए जाने वाले काश पटेल को सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) का चीफ बनाया जा सकता है. अभी तक काश ही इस पद के लिए शीर्ष दावेदार बताए भी जा रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स का तो यह भी कहना है कि ट्रंप ने चुनाव जीतने से पहले ही यह मन बनाया हुआ था कि अगर उन्हें जीत मिली तो अपनी नई सरकार में वह काश पटेल को ही इस पद की जिम्मेदारी देंगे.
काश पटेल की अगर बात करें तो इन्होंने अयोध्या राम मंदिर का खुलकर समर्थन किया था. इसके साथ ही राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान उन्होंने विदेशी मीडिया पर एंटी हिंदू होने का आरोप लगाया था. दरअसल विदेशी मीडिया में राम मंदिर के विवाद को 50 साल पुराना बताया जा रहा था. इसी बात से नाराज होकर उन्होंने मीडिया के रवैये पर टिप्पणी की थी.
काश पटेल ने कहा था कि मीडिया अयोध्या के 50 सालों की बात कर रही है जबकि वह भूल रहे हैं कि राम मंदिर का इतिहास 500 साल से भी पुराना है. उन्होंने कहा कि 500 साल पहले हिंदू मंदिर को गिरा दिया गया था जिसके बाद से ही उसके वापस निर्माण की पूरी कोशिश की जा रही थी. काश पटेल ने विदेशी मीडिया को घेरते हुए कहा था कि मीडिया यह बात बताने से बच रही है जिससे भारत और वहां के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा सके.
गुजराती परिवार से ताल्लुक रखते हैं काश पटेल काश पटेल के पिता भारतीय प्रवासी हैं. उनका जन्म एक गुजराती परिवार में हुआ है. साल 1970 में काश पटेल के माता-पिता युगांडा से भागकर कनाडा के रास्ते अमेरिका पहुंचे थे. साल 1988 में पटेल के पिता को अमेरिका की नागरिकता मिल गई जिसके बाद से वह परिवार समेत बतौर अमेरिकी नागरिक अपना जीवन बिता रहे हैं.
काश पटेल ने वकालत की पढ़ाई की है. कुछ समय उन्होंने लॉ फर्म में नौकरियां भी कीं. बड़ी फर्म में नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने सरकारी वकील के तौर पर काम करना शुरू किया. साल 2013 में काश पटेल न्याय विभाग में शामिल हुए. जिसके करीब तीन साल बाद साल 2016 में पटेल को खुफिया मामले से जुड़ी एक स्थायी समिति में कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया गया. उस दौरान डेविड नून्स इस विभाग के चीफ थे जो ट्रंप के कट्टर सहयोगी भी माने जाते थे.
साल 2016 के चुनाव में काश पटेल को रूसी हस्तक्षेप को लेकर एक समिति में शामिल किया गया. इस पर काम करते हुए ही काश पटेल पहली बार ट्रंप की नजरों में आए थे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 में जब ट्रंप राष्ट्रपति थे तो उन्होंने जो बाइडेन के बेटे के बारे में जानकारी जुटाने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया था.

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