
ये है दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट, भारत और पाकिस्तान की रैंकिंग क्या?
AajTak
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स ने सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की अपनी हालिया लिस्ट जारी की है. लिस्ट में सिंगापुर ने टॉप किया है. भारत ने पिछली बार से थोड़ा निराशाजनक प्रदर्शन किया है.
दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की हालिया लिस्ट जारी हो चुकी है. मंगलवार को जारी हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 (Henley Passport Index) में सिंगापुर ने टॉप किया है. सिंगापुर का पासपोर्ट दुनिया का सबसे मजबूत पासपोर्ट है जिसके नागरिक दुनिया के 227 डेस्टिनेशन में से 195 डेस्टिनेशन्स पर वीजा फ्री यानी बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं.
क्या है भारत की रैंकिंग
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में भारत 82वें स्थान पर है. भारत के नागरिक 58 विदेशी डेस्टिनेशन्स पर वीजा फ्री एंट्री कर सकते हैं. भारत ने पिछली बार इस इंडेक्स में थोड़ा अच्छा प्रदर्शन किया था और 61 वीजा फ्री डेस्टिनेशन के साथ 81वां स्थान हासिल किया था.
वहीं, पाकिस्तान ने हर बार की तरह इस बार भी पासपोर्ट इंडेक्स में बेहद खराब प्रदर्शन किया है. पाकिस्तान नीचे से पांचवें स्थान पर है. 103 देशों की लिस्ट में पाकिस्तान 100वें स्थान पर है. पाकिस्तान के नागरिक 33 देशों में वीजा फ्री एंट्री कर सकते हैं. लिस्ट में पाकिस्तान से नीचे यमन, इराक, सीरिया और सबसे नीचे अफगानिस्तान है.
शीर्ष 5 देश
सिंगापुर के बाद शक्तिशाली पासपोर्ट की लिस्ट में दूसरे स्थान पर 192 वीजा फ्री ट्रैवल डेस्टिनेशन्स के साथ फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और स्पेन हैं. तीसरे स्थान पर 191 वीजा फ्री ट्रैवल डेस्टिनेशन्स के साथ ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, आयरलैंड, लग्जमबर्ग, नीदरलैंड्स, दक्षिण कोरिया और स्वीडन हैं. लिस्ट में चौथे स्थान पर 190 वीजा फ्री डेस्टिनेशन्स के साथ बेल्जियम, डेनमार्क, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, स्विटजरलैंड और ब्रिटेन हैं. पांचवें स्थान पर 189 वीजा फ्री ट्रैवल डेस्टिनेशन के साथ ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल हैं.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.






