'ये गिरफ्तारी अवैध है', बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा अमृता फडणवीस को 'ब्लैकमेल' करने वाला बुकी
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देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने बीते दिनों एक डिजाइनर पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुंबई के मालाबार हिल पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया था. अमृता की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने 2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी. अमृता ने आरोप लगाया था कि अनिक्षा नाम की एक महिला डिजाइनर ने उन्हें धमकी दी, साजिश रची और 1 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और जबरन वसूली से जुड़े मामले में आरोपी और देश का टॉप बुकी अनिल जयसिंघानी और उसके चचेरे भाई निर्मल ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उसने कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए एफआईआर को रद्द करने की अपील की है. कोर्ट इस मामले में सोमवार 27 मार्च को सुनवाई करेगी.
जयसिंघानी ने अधिवक्ता मनन शंघाई और मृगेंद्र सिंह के माध्यम से दायर एक रिट याचिका में दावा किया है कि उनकी गिरफ्तारी "अवैध" है और उन्हें पुलिस हिरासत में भेजने के सत्र अदालत के आदेश को रद्द करने की भी मांग की गई है. उन्होंने दावा किया है कि उनकी गिरफ्तारी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 41 और 41ए का उल्लंघन है और उन्हें गिरफ्तार करते समय कानून के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. इसलिए उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए.
याचिका में कहा गया है, "आरोपियों को बिना कानूनी औचित्य के निर्धारित अवधि से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रखा गया है. यह भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. अभियुक्तों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने में देरी और अनिवार्यता का पालन नहीं किया गया है. संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा सीआरपीसी के प्रावधानों ने अभियुक्तों के प्रति गंभीर पूर्वाग्रह पैदा किया है.
36 घंटे बाद कोर्ट में पेश किया- वकील
वकीलों ने कहा कि मुंबई पुलिस के डिविजनल कमिश्नर बालसिंह राजपूत ने मीडिया से कहा था कि अनिल को 19 मार्च की रात 11 बजकर 45 मिनट पर गिरफ्तार किया गया था और गिरफ्तारी के 36 घंटे बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जो कि निर्धारित कानून के विपरीत है. अनिल और उसके भाई को 19 मार्च को मुंबई पुलिस गुजरात से लाई और फिर 21 मार्च को अदालत में पेश किया. नियमों के मुताबिक आरोपी को गिरफ्तार होने के 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करना होता है.
हालांकि मुंबई पुलिस ने कहा था कि मुंबई की साइबर पुलिस गुजरात गई थी और अनिल को ही हिरासत में लिया गया था. अनिल को मुंबई लाए जाने के बाद ही उसकी पहचान की पुष्टि की गई और फिर उसे 20 मार्च को शाम 5 बजे गिरफ्तार कर लिया गया. मामले में दी गई सभी दलीलों पर विचार करने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामलों की विशेष अदालत ने अनिल और निर्मल को 27 मार्च तक मुंबई पुलिस की हिरासत में भेज दिया था. इसी आदेश को बुकी और उसके भाई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

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