
यूपी में NDA का विजय रथ रोक पाएगा सपा का PDA? अखिलेश ‘MY’ के भरोसे क्यों नहीं रहना चाहते
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2024 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एनडीए को हराने के लिए पीडीए का दांव चल दिया है. पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक. अखिलेश यादव 2024 के चुनाव में मुस्लिम-यादव के सहारे क्यों नहीं रहना चाहते?
देश में अगले साल होने वाले आम चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खिलाफ विपक्ष की रणनीति क्या हो, इसे लेकर 23 जून को बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी दलों की बड़ी बैठक है. बैठक से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने '80 हराओ, बीजेपी हटाओ' का नारा दे दिया है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने '80 हराओ, बीजेपी हटाओ' के नारे के साथ ही पीडीए की भी बात की है. अखिलेश यादव ने कहा है कि 2024 में एनडीए को पीडीए हराएगा. पीडीए मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक. अखिलेश के इस नारे से साफ है कि सपा ने भी ये मान लिया है कि यादव और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे बीजेपी से पार पाना मुश्किल है.
इसे अखिलेश यादव के फ्रंटफुट पर खेलने की रणनीति बताया जा रहा है. यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से 80 बनाम 20 की लड़ाई वाले बयान छाए रहे थे. बीजेपी की ओर से विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए इसी वार को लेकर अब अखिलेश चुनावी पलटवार करते दिखते हैं.
क्या है अखिलेश यादव का पीडीए समीकरण
पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक. ताकत की बात करें तो अनुमानों के मुताबिक यूपी में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी करीब 41 फीसदी है जिसमें करीब 10 फीसदी यादव हैं. दलित आबादी करीब 21 फीसदी और अल्पसंख्यक आबादी भी करीब 20 फीसदी होने का अनुमान है. ऐसे में देखें तो यूपी में कुल करीब 82 फीसदी आबादी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों की है.
अखिलेश के पीडीए पर क्यों उठ रहे सवाल

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