
यूपी-बिहार में यादव वोटों पर बीजेपी की सर्जिकल स्ट्राइक, क्यों बढ़ सकती हैं अखिलेश-तेजस्वी की मुश्किलें
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2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी का नारा है अबकी बार 400 के पार. शायद यही कारण है कि बीजेपी दूसरी पार्टियों के कोर वोटर्स को भी हथियाने में लग गई है. उत्तर प्रदेश और बिहार में कुछ ऐसी ही तैयारी है बीजेपी की जिससे सपा और आरजेडी का चिंतित होना स्वभाविक है.
आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में लगे यूपी में अखिलेश यादव और बिहार में तेजस्वी यादव को एक और झटका लगा है. उत्तर प्रदेश में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर, महान दल अध्यक्ष केशवचंद्र मौर्य और नोनिया समाज के नेता दारा सिंह चौहान के बाद अब यादव महासभा पर भी उनका एकाधिकार खत्म होता दिख रहा है.सालों से मुलायम सिंह यादव को नेता मानती रही अखिल भारतीय यादव महासभा दो फाड़ हो गई है. यादव महासभा में टूट के बाद टूटे धड़े की बड़ी बैठक आज लखनऊ के एक होटल में हो रही है. उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी यादव महासभा के कार्यक्रम में शिरकत किए हैं. हो सकता है कि यादव महासभा आज श्रीकृष्ण जन्मभूमि के संबंध में बड़ा ऐलान कर सकती है. यूपी में यादव तबके ने यादव मंच बना कर सपा की सियासत की छाया से खुद को अलग कर लिया है.
दूसरी ओर मध्यप्रदेश के नवनिर्वाचित सीएम मोहन यादव का बिहार दौरा होने जा रहा है. यादवों के वोटों पर बिहार में कई बार चुनाव जीत चुकी आरजेडी के लिए चिंता होना स्वभाविक है. बीजेपी को अगड़ों की पार्टी कहने वाली पार्टियों को बीजेपी ने मोहन यादव को मध्यप्रदेश का सीएम बनाकर यह संदेश दिया है कि वो सबकी पार्टी हैं.
यादव महासभा में 2 फाड़
अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव की तरह अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा की कमान संभाल नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि यूपी में बीजेपी से जुड़े अरुण यादव के हाथों में इस गैरराजनीतिक संगठन की प्रदेश कमान है. हाल ही में अरुण यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अहीर रेजीमेंट की मांग पर समर्थन मांगा था. यादव का दावा है कि योगी ने इस संबंध में यादव समाज की मांग का समर्थन करने का वादा किया है. अखिल भारतीय यादव महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष का बसपा के सांसद श्याम सिंह यादव हैं. जिनके बारे में कहा जाता रहा है कि वे बीजेपी के साथ कभी भी जा सकते हैं. पिछले साल शाहजहांपुर में हुए यादव महासभा के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर योगी सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना शामिल हुए थे. आज 15 जनवरी को लखनऊ के एक होटल में यादव महासभा के एक गुट की बैठक हो रही है . यह गुट खुद को यादव महासभा से अलग होकर अलग गुट बनाने का दावा कर रहा है. इस गुठ की बैठक में बीजेपी नेता और प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के पहुंचने का सीधा मतलब है कि यह गुट बीजेपी का समर्थन करेगा.
हालांकि इसकी शुरुआत 2022 में ही हो गई थी. कानपुर के मेहरबान सिंह पुरवा गांव से ताल्लुक रखने वाले प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित यादव परिवारों में से एक के भाजपा में चले जाने के बाद से ही यादव महासभा को भाजपामय बनाने का काम चल रहा था. मेहरबान सिंह पुरवा के चौधरी हरमोहन सिंह यादव खांटी समाजवादी नेता माने जाते थे. कभी मुलायम सिंह यादव से उनकी नजदीकियां थीं. 25 जुलाई 2022 को जब हरमोहन सिंह यादव की पुण्यतिथि पर जब मेहरबान सिंह पुरवा में गोष्ठी हुई तो पीएम नरेंद्र मोदी ने आयोजन को वर्चुअली संबोधित करके अपने इरादे जता दिए थे. हरमोहन सिंह यादव के बेटे, पूर्व सपा सांसद सुखराम यादव ने तो कार्यक्रम में अपने बेटे मोहित यादव को भाजपा को सौंपने का ऐलान तक कर दिया था. इसके बाद से ही यह कयास लगाए जाने लगे थे कि अब भाजपा समाजवादी पार्टी के कोर वोटर्स यादवों के वोट भी हथियाने की फिराक में है. शायद यही कारण था कि कार सेवकों पर गोली चलाने वाले मुलायम सिंह यादव को पद्मविभूषण दिया गया था. इस तरह बीजेपी यादव वोटों को अपना बनाने के लिए लगातार कई सालों से काम कर रही है. इसी क्रम में मध्यप्रदेश में मोहन सिंह यादव को चीफ मिनिस्टर बनाया गया है.
2023 में जब मेहरबान सिंह पुरवा में चौधरी हरमोहन सिंह यादव की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम हुआ तो समाजवादी पार्टी के तमाम लोगों ने इससे दूरी बना ली थी. उसके बाद से ही यह तय माना जा रहा था कि यादव महासभा में अब 2 फाड़ होकर ही रहेगा.

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