
यूनुस सरकार का कट्टरपंथी एजेंडा, हिज्ब-उत-तहरीर के मेंबर को बना दिया बांग्लादेश का गृह सचिव
AajTak
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार का कट्टरवादी एजेंडा एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. यूनुस सरकार ने कट्टरवादी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) के संस्थापक सदस्य नसीमुल गनी को नया गृह सचिव नियुक्त किया है.
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार का कट्टरवादी एजेंडा एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. यूनुस सरकार ने कट्टरवादी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) के संस्थापक सदस्य नसीमुल गनी को नया गृह सचिव नियुक्त किया है.
बता दें कि हिज्ब-उत-तहरीर संगठन पर जमात-ए-इस्लामी आंदोलन और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के साथ मिलकर छात्र आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप है. इस आंदोलन के बाद ही अगस्त महीने में प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटना पड़ा था.
भारत से जुड़ी पोस्ट को लेकर हुई थी आलोचना
इस वक्त बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का शासन है, जिसकी कमान मुहम्मद यूनुस संभाल रहे हैं. उनके करीबी सहयोगी महफूज आलम भी कथित तौर पर HUT से जुडे़ हुए हैं. आलम को हाल ही में उस समय आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की वकालत करती हुई एक विवादास्पद पोस्ट की थी.
24 साल पहले हुई थी कट्टरपंथी संगठन की स्थापना
HUT की बांग्लादेश शाखा की स्थापना 2000 में गनी और कवसर शाहनवाज ने ढाका विश्वविद्यालय के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन संस्थान के पूर्व संकाय सदस्य सैयद गुलाम मौला की देखरेख में की थी. यह बीएनपी-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के शासन के दौरान हुआ था.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











