
'यूक्रेन ने नहीं मानी मांगें तो भारत-पाकिस्तान बॉर्डर जैसा होगा हाल', यूक्रेन को रूसी समर्थक ग्रुप की चेतावनी
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रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी को शुरू हुई जंग को अब लगभग डेढ़ महीना पूरा होने जा रहा है. इस बीच अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत तमाम पश्चिमी देशों ने संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस की निंदा की और उसके खिलाफ अलग-अलग तरह के कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं.
यूक्रेन पर रूस (Russia-Ukraine) के हमले लगातार जारी हैं. रूसी हमलों में कीव, खारकीव, मारियुपोल और बूचा समेत कई शहर तबाह हो चुके हैं. युद्ध में अब तक हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. तनावपूर्ण स्थितियों के बीच यूक्रेन के डोनेट्स्क में रूसी सेना का समर्थन कर रहे ग्रुप ने बड़ी चेतावनी दी है. डोनेट्स्क पीपुल्स मिलिशिया (डीपीआर) के आधिकारिक प्रतिनिधि एडुआर्ड अलेक्जेंड्रोविच बसुरिन ने कहा है कि अगर यूक्रेन ने रूस की मांगों को नहीं माना तो हालात भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन सीमा की तरह हो जाएंगे.
बसुरिन ने कहा कि यह बात हर कोई जानता है कि यूक्रेन में पश्चिमी ताकतों द्वारा रूसी संघ को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है. वो लोग नहीं रुकने वाले नहीं हैं, उनका अगला टारगेट भारत होगा. प्रवक्ता ने कहा कि सारी दुनिया जानती है कि भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन सीमा दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिसका सामाधान वर्षों से नहीं निकल पाया है.
उन्होंने कहा कि मारियुपोल में रूसी संघ ने सुरक्षित मानवीय गलियारे के बदले बंदरगाह शहर के लोगों से हथियार डालने की मांग की है. साथ ही साथ इस क्षेत्र में हम विसैन्यीकरण और विमुद्रीकरण को भी लागू करना चाहते हैं, अगर मारियुपोल में यह मांगें पूरी नहीं होती है तो स्थिति भारत-चीन, भारत-पाकिस्तान सीमा जैसी होगी.
भारत क्यों बनेगा टारगेट? उन्होंने कहा कि भारत में भी क्षेत्रीय, भाषा, आस्था जैसी ही समस्याएं हैं. सब कुछ जो यूक्रेन में आधारशिला था, भारत में वही है. यही कारण है कि मैं समझता हूं कि भारत इस समय यूक्रेन के घटनाक्रम को क्यों देख रहा है. बसुरिन ने कहा कि अगर इस वक्त रूस-यूक्रेन के बीच जो कुछ भी हो रहा है उसमें भारत को रूस का साथ देना चाहिए. भारत से समर्थन की अपील करते हुए उन्होंने कहा, 'अगर आपकी (भारतीय) आबादी का पांच प्रतिशत हमारी मदद करेगा तो हम जीतेंगे और यह जंग को खत्म किया जा सकता है.
आंख मूंदकर नहीं लेकिन मदद करें भारत उन्होंने कहा, मैं भारत से आंख मूंदकर हमारी मदद करने के लिए नहीं कह रहा हूं. आप कई तरह से मदद कर सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तटस्थता का रुख भी मददगार है.' डोनेट्स्क सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि हमारी धरोहर अब इतिहास बन रही है. हम बदकिस्मत हैं, क्योंकि यह सबकुछ हमारी जमीन पर हो रहा है. उन्होंने कहा कि हमें रिकवरी के बारे में सोचने की जरूरत है. लेकिन रिकवरी से पहले इस जंग को कैसे को जीता जा सके इस पर जोर देना है. क्योंकि रिकवरी कल के लिए है और जीत आज की है.
भारत ने की है बूचा नरसंहार की निंदा डोनेट्स्क के सैन्य प्रवक्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने यूक्रेन के बूचा में आम नागरिकों की हत्याओं की निंदा की. उन्होंने बूचा से आईं ख़बरों को 'भीतर तक परेशान करने वाला' बताया है और संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच की जाए. तिरुमूर्ति की ओर से दिए गए इस बयान को यूक्रेन युद्ध पर भारत की ओर से आई अब तक की सबसे कड़ी प्रतिक्रिया माना जा रहा है. कई लोग इसे रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख में बदलाव के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं.

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