
मोदी सरकार की नई शिक्षा पॉलिसी के विरोध में विपक्षी छात्र संगठनों ने बनाया 'INDIA' जैसा मोर्चा
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छात्र मोर्चा के मुताबिक, वे यह मार्च नई शिक्षा नीति 2020, एनईईटी, फीस वृद्धि और शिक्षा के सांप्रदायिकरण के खिलाफ बुला रहे हैं. संयुक्त बैठक में छात्रों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधने के लिए 'शिक्षा बचाओ, एनईपी खारिज करो' का नारा अपनाया है.
दिल्ली में विभिन्न वामपंथी झुकाव वाले और अन्य विपक्षी छात्र संगठनों ने 12 जनवरी 2024 को मेगा संसद मार्च बुलाया है. छात्र संगठन अपने मोर्चे को यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ इंडिया बता रहे हैं, जिसमें AISA, AISF, CYSS, NSUI, SFI और अन्य आदिवासी और द्रविड़ छात्र राजनीतिक दल शामिल हैं. कुल 16 छात्र संगठन इसका हिस्सा हैं. मेगा स्टूडेंट फ्रंट ने 1 फरवरी 2024 को चेन्नई में एक रैली भी बुलाई है. विपक्षी संगठनों ने मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति के विरोध में विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की तर्ज पर मोर्चा बनाया है.
छात्र मोर्चा के मुताबिक, वे यह मार्च नई शिक्षा नीति 2020, एनईईटी, फीस वृद्धि और शिक्षा के सांप्रदायिकरण के खिलाफ बुला रहे हैं. संयुक्त बैठक में छात्रों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधने के लिए 'शिक्षा बचाओ, एनईपी खारिज करो' का नारा अपनाया है.
जेएनयूएसयू अध्यक्ष और एसएफआई नेता आइशी घोष ने इस बारे में बताया, "2019 में एक समन्वय समिति का गठन किया गया था और बाद में और अधिक छात्र संगठन इसमें शामिल हुए और अब हमने यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ इंडिया का गठन किया है. महामारी वाले वर्ष में सरकार ने छात्रों पर नई शिक्षा नीति थोप दी. सरकार शिक्षा की अनदेखी कर रही है और अब उन्होंने ठेकेदारी प्रथा अपना ली है और वे सरकारी स्कूलों का भी निजीकरण कर रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि विपक्षी छात्र नेताओं के अनुसार इस शासन में शिक्षा का सांप्रदायिकरण भी आम हो गया है और यह मार्च सरकार की नीतियों के खिलाफ उनका जवाब है. एनईपी में लैंगिक संवेदनशीलता गायब है, एनईपी में इस बारे में एक भी जिक्र नहीं है.
एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव नीतीश गौड़ ने कहा, "हम एनईपी की शुरुआत के पहले दिन से ही इसकी निंदा कर रहे हैं और हम सभी चरणों और सभी कार्यक्रमों में सरकारी नीतियों के खिलाफ खड़े रहेंगे." जब उनसे मार्च के रूट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि छात्र संगठन इस पर निर्णय ले रहे हैं और हम मार्च के लिए प्रशासन के साथ बातचीत कर रहे हैं.

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