
'मैं कभी नहीं कर पाई स्वीमिंग'... सुधा मूर्ति को आज भी इस बात को लेकर पछतावा
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नारायण मूर्ति कहते हैं कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है. उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा गर्व का पल तब था जब नैसडेक पर इंफोसिस लिस्ट हुई थी और यह पहली भारतीय कंपनी बनी थी.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव (India Today Conclave 2024) में बोलते हुए सुधा मूर्ति (Sudha Murty) ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा प्राउड मोमेंट तब था जब उन्होंने 3000 सेक्स वर्कर्स को नार्मल लाइफ कन्वर्ट करने में मदद की थी. हालांकि सुधा मूर्ति के लिए स्वीमिंग नहीं सीख पाना सबसे बड़ा पछतावा है. उन्होंने कहा कि जब वे पूल में पानी को देखती थीं तो वह जम्प करने से डरती थी. इसलिए वे कभी भी स्वीमिंग नहीं सीख पाईं.
वहीं नारायण मूर्ति (Narayan Murty) ने कहा कि उन्हें अपने लाइफ में किसी बात को लेकर रिगरेट नहीं है, लेकिन उन्होंने बताया कि जब वे इंफोसिस (Infosys) को चला रहे थे और वह कंपनी अच्छे से ग्रोथ नहीं कर रही थी, जैसा कि नारायण मूर्ति चाहते थे. तब उनके लिए अच्छा समय नहीं था. नारायण मूर्ति कहते हैं कि यह उनके लिए कोई पछतावा नहीं है. उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा गर्व का पल तब था जब नैसडेक पर इंफोसिस लिस्ट हुई थी और यह पहली भारतीय कंपनी बनी थी.
मां ने इमरजेंसी में सेविंग करने की दी थी सलाह सुधा मूर्ति ने कहा कि जब उनकी शादी हुई तो उनकी मां ने पैसा सेविंग करने की सलाह दी थी. सुधा मूर्ति ने कहा कि मां की सलाह के बाद मैंने नारायण मूर्ति से छिपाकर पैसे की सेविंग करना शुरू किया था. हर महीने मैं पैसे की सेविंग करती थी. फिर एक दिन नारायण मूर्ति ने उनसे कहा कि अगला रिवेल्युएशन सॉफ्टवेयर में आने वाला है और वह एक कंपनी शुरू करना चाहते हैं.
इंफोसिस के शुरुआत के लिए दिए 10 हजार सुधा ने नारायण मूर्ति के मदद के लिए अपने कुल सेविंग 10250 रुपये में से 10 हजार रुपये दिए और 250 रुपये अपने पास रख लिए. सुधा मूर्ति ने बताया कि यह उनके लिए सबसे अच्छा इन्वेस्टमेंट था.
बता दें कि इंडिया टुडे कॉन्क्लेव (India Today Conclave 2024) में देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) के को-फाउंडर एन आर नारायण मूर्ति (N R Narayana Murthy) और उनकी पत्नी सुधा मूर्ति (Sudha Murthy) शामिल हुईं. उन्होंने इस दौरान इंफोसिस की शुरुआत से लेकर अपनी शादी तक के बारे में खुलकर चर्चा की.

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