
मुस्लिम देशों में फूट को लेकर दुखी हुआ तुर्की, कहा- हमें अपनों से ही...
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लगभग दो महीने पहले शुरू हुए हमास-इजरायल युद्ध को लेकर कुछ मुस्लिम देशों ने इजरायल के प्रति नरम रुख अपनाया है. तुर्की की सांसद के स्पीकर ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि ये दुर्भाग्य है कि हमले के 60 दिनों के बाद भी मुस्लिम देशों की प्रतिक्रियाएं पर्याप्त नहीं हैं.
हमास और इजरायल में जारी युद्ध के बीच तुर्की ने मुस्लिम दुनिया में फूट पर चिंता जाहिर की है. तुर्की की सांसद के स्पीकर नुमान कुर्तुलमुस ने कहा है कि इजरायल की सबसे बड़ी ताकत उसकी अपनी क्षमताओं में नहीं, बल्कि इस्लामिक दुनिया में विभाजन से है.
गाजा में जारी इजरायली हमलों पर टिप्पणी करते हुए कुर्तुलमुस ने कहा कि यह निराश करने वाली बात है कि हमले के लगभग 60 दिन बीत जाने के बावजूद इस्लामिक देशों और संगठनों की प्रतिक्रियाएं पर्याप्त नहीं हैं.
दरअसल, इजरायल-फिलिस्तीन की हालिया लड़ाई को लेकर कुछ मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया देख ऐसा लगता है कि इजरायल के प्रति वो नरम रुख अपना रहे हैं. इस्लामिक देश यूएई ने तो हालिया लड़ाई के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया था.
यह दुर्भाग्य की बातः कुर्तुलमुस
बुधवार को तुर्की की सांसद के स्पीकर नुमान कुर्तुलमुस ने कतरी अखबार अल-शार्क से बातचीत में कहा, "आज इजरायल की सबसे बड़ी ताकत उसकी अपनी क्षमताएं नहीं, बल्कि दुर्भाग्य से इस्लामिक दुनिया में फूट है. तुर्की गाजा में जरूरतमंद लोगों तक सभी प्रकार की मानवीय सहायता भेजने के प्रयासों में लगा है. लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि 60 दिनों के बाद भी इस्लामिक देशों की प्रतिक्रियाएं अपर्याप्त हैं."
उन्होंने आगे कहा, "तुर्की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजरायली हमलों के बारे में बात करने की कोशिश करता है लेकिन उसे इजरायल की रक्षा करने वाले देशों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ता है. यही कदम लोगों को सबसे अधिक दुखी करता है. लोग गाजा में होने वाली घटनाओं को बहुत पीड़ा की नजरों से देखते हैं और उसकी निंदा भी करते हैं. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाता है, जिससे कोई परिणाम निकले."

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