
मिस्र में मिली बुद्ध की मूर्ति और संस्कृत में लिखा शिलालेख, खुले भारत से जुड़े कई राज
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मिस्र में रोमन साम्राज्य के दौर की एक बुद्ध की प्रतिमा मिली है. पुरातत्विदों का कहना है कि इससे रोमन साम्राज्य और प्राचीन भारत के बीच व्यापार संबंधों के संकेत मिलते हैं. खोजकर्ताओं ने एक शिलालेख भी खोज निकाला है जो संस्कृत में है.
मिस्र में लाल सागर के पास स्थित बेर्निस के प्राचीन बंदरगाह में महात्मा बुद्ध की एक प्रतिमा की खोज की गई है. बुद्ध की यह प्रतिमा दूसरी शताब्दी की बताई जा रही है. इस महत्वपूर्ण खोज से संकेत मिलता है कि रोमन साम्राज्य और भारत के बीच व्यापारिक संबंध थे. 71 सेंटीमीटर लंबी प्रतिमा के चारों ओर आभामंडल है और उसके बगल में एक कमल का फूल बना दिख रहा है.
मिस्र की पुरावशेष मंत्रालय के एक बयान में बुधवार को कहा गया कि एक पोलिश-अमेरिकी मिशन ने प्रतिमा की खोज की है. बयान में कहा गया, 'बेर्निस में प्राचीन मंदिर में खुदाई के दौरान रोमन काल की प्रतिमा की खोज की गई है.'
समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए मिस्र की सर्वोच्च पुरावशेष परिषद के प्रमुख मुस्तफा अल-वजीरी ने कहा, 'इस खोज से रोमन साम्राज्य के दौरान मिस्र और भारत के बीच व्यापार संबंधों की मौजूदगी के महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं.'
खोजकर्ताओं ने बुद्ध की जो प्रतिमा खोजी है, उसका दाहिना हिस्सा और दाहिना पैर गायब है. 71 सेंटीमीटर (28 इंच) ऊंची बुद्ध की प्रतिमा के चारों ओर एक आभामंडल बना है और उनके बगल में एक कमल का फूल भी बना दिख रहा है.
मिस्र के बड़े बंदरगाहों में शामिल था बेर्निस
वजीरी ने कहा कि बेर्निस रोमन युग के मिस्र में सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक था. इसी बंदरगाह से भारत और दुनिया के बाकी देशों से मसाले, कीमती पत्थर, कपड़े और हाथी दांत मिस्र आते थे.

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