
मालेगांव ब्लास्ट केस: प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ वारंट जारी, कोर्ट ने 13 नवंबर तक पेश होने को कहा
AajTak
मुंबई से लगभग 200 किमी दूर उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में 29 सितंबर, 2008 को एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल में रखे बम में विस्फोट होने से 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे. इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस द्वारा की गई थी, 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी के पास ट्रांसफर कर दिया गया.
मुंबई के स्पेशल एनआईए कोर्ट ने मंगलवार को 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी भाजपा नेता प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ कार्यवाही में शामिल नहीं होने पर जमानती वारंट जारी किया. विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने कहा कि मामले में अंतिम बहस चल रही है और आरोपी की उपस्थिति आवश्यक है. उन्होंने प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ 10,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया.
वारंट 13 नवंबर तक वापस किया जा सकता है, जिसका मतलब है कि ठाकुर को तब तक अदालत में पेश होना होगा और इसे रद्द कराना होगा. भाजपा नेता के वकील ने विशेष एनआईए अदालत से उन्हें उपस्थित रहने के लिए उचित समय देने का अनुरोध करते हुए उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया. लेकिन अदालत ने कहा कि आरोपी प्रज्ञा ठाकुर 4 जून से ही अदालत की कार्यवाही में शामिल नहीं हुई हैं.
यह भी पढ़ें: 'जानबूझकर, इरादतन और बार-बार...', मालेगांव विस्फोट केस में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित पर जुर्माना लगाते हुए अदालत ने क्या कहा?
विशेष न्यायाधीश ने कहा, बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने के आधार पर छूट के उनके पिछले आवेदनों पर समय-समय पर विचार किया गया है. अदालत ने पेशी के लिए समय की मांग वाली उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा, 'आज, मेडिकल सर्टिफिकेट की फोटो कॉपी के साथ आवेदन दायर किया गया, जिसमें दिखाया गया कि वह आयुर्वेदिक उपचार ले रही हैं, लेकिन मूल प्रमाणपत्र संलग्न नहीं है.'
यह भी पढ़ें: मालेगांव ब्लास्ट केस: 'ATS ने मुझे टॉर्चर किया... RSS-VHP नेताओं, योगी का नाम लेने को कहा', लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित का कोर्ट में लिखित बयान
मुंबई से लगभग 200 किमी दूर उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में 29 सितंबर, 2008 को एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल में रखे बम में विस्फोट होने से 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे. प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और पांच अन्य पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत विस्फोट की साजिश में कथित संलिप्तता के लिए मुकदमा चल रहा है. इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस द्वारा की गई थी, 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी के पास ट्रांसफर कर दिया गया.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.

नोएडा के सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. हादसे के जिम्मेदार बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों पर भी गाज गिरी है. प्रशासन ने अब भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं.







