
माफी की मांग पर बोले राहुल- मेरा नाम गांधी है, सावरकर नहीं
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राहुल गांधी ने शनिवार को प्रेस वार्ता की. इस दौरान उनसे पत्रकारों ने सदस्यता जाने को लेकर और इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर सवाल पूछे. राहुल गांधी ने एक सवाल के जवाब में सावरकर का नाम लिया और कहा कि मैं गांधी हूं, सावरकर नहीं. दरअसल ये जवाब उन्होंने माफी को लेकर पूछे गए सवाल पर दिया.
लोकसभा की सदस्यता गंवाने के एक दिन बाद शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी समेत भाजपा पर जमकर हमला बोला. इस दौरान उन्होंने मोदी-अडानी रिश्ते पर सवाल उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि वह सवाल पूछते रहेंगे और उन्हें इससे डर नहीं लगता है. जब उनसे माफी को लेकर एक सवाल किया गया तो उन्होंने एक बार फिर सावरकर का जिक्र किया. इस दौरान राहुल गांधी ने कहा- गांधी कभी माफी नहीं मांगता. मैं सावरकर नहीं हूं.
मेरा नाम गांधी है: राहुल गांधी शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी से एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि, जब ये लोग 'माफी मांग लेते कहते हैं' तो राहुल गांधी क्या सोचते हैं. इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा, 'राहुल गांधी सोचता है कि मेरा नाम सावरकर नहीं है, मेरा नाम गांधी है'
'मैं अपना काम करता रहूंगा' कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भले ही वे मुझे स्थायी रूप से अयोग्य घोषित कर दें, मैं अपना काम करता रहूंगा. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं संसद के अंदर हूं या नहीं. मैं देश के लिए लड़ता रहूंगा.मैं सवाल पूछना बंद नहीं करूंगा. अडानी का नरेंद्र मोदी जी से क्या रिश्ता है? यह मैं पूछता रहूंगा. मैं हिंदुस्तान के लोकतंत्र के लिए लड़ रहा हूं. मैं लोकतंत्र के लिए लड़ता रहूंगा. मैं किसी से नहीं डरता.
सूरत सेशंस कोर्ट ने माना था मोदी सरनेम केस में दोषी राहुल गांधी ने कहा, 'मैंने दो बार स्पीकर महोदय से कहा कि मुझे बोलने दिया जाए, पत्र लिखकर मांग की थी, उन्होंने मुस्कुरा कर कहा मैं तो नहीं कर सकता.' बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मोदी सरनेम केस में दो साल की सजा मिलने के बाद शुक्रवार को स्पीकर ओम बिरला ने उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी. राहुल गांधी को सूरत सेशंस कोर्ट ने दोषी करार दिया था. हालांकि अभी उनके पास ऊपर की अदालत में अपील करने का विकल्प है.

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AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









