
माफिया मुख्तार अंसारी की बुलंदी और बेबसी के किस्से... जब जेल में तालाब खुदवाने वाला कुरकुरे के लिए तरस गया!
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उत्तर प्रदेश के मऊ से पूर्व विधायक गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को गाजीपुर के मोहम्मदाबाद की कालीबाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. इस दौरान वहां हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे. बांदा जेल में हार्ट अटैक से मौत होने के बाद मुख्तार के शव को भारी सुरक्षा के बीच मोहम्मदाबाद लाया गया था.
''माटी कहे कुम्हार से तू क्या रौंदे मोए, इक दिन ऐसा आयेगा मैं रौंदूंगी तोए''... संत कबीर दास की ये पंक्तियां गैंगस्टर मुख्तार अंसारी पर सटीक बैठती हैं. एक वक्त था जब उसकी पूरे यूपी में तूती बोलती थी. पुलिस और प्रशासन की बात तो छोड़िए सरकार भी उसके इशारे पर काम करती थी. पूर्वांचल के कई जिलों में आतंक ऐसा था कि लोग उसके नाम से थर थर कांपते थे. साल 2005 में हुए मऊ दंगे का वो दृश्य भला कौन भूल सकता है, जब खुली जीप में हथियार लहराते मूंछों पर ताव देते हुए आगे-आगे मुख्तार चल रहा था, पीछे-पीछे पुलिस उसके गुर्गों की तरह दौड़ रही थी.
मुख्तार अंसारी के लिए जेल भी पनाहगाह हुआ करती थी. वहां उसके लिए हर सुख सुविधा ध्यान रखा जाता था. फाइव स्टार सुविधाएं मिलती थी. जेल प्रशासन से लेकर पुलिस तक में उसका नेटवर्क था. उसे सियासी समर्थन हासिल था. इसलिए उसके खिलाफ बोलने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता था. साल 2005 में अपने जानी दुश्मन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कराने से पहले वो यूपी की फतेहगढ़ जेल में बंद हो गया था. उसके बाद उसे गाजीपुर जेल में शिफ्ट गया था. बताया जाता है कि मछली खाने के शौकीन रहे मुख्तार को जेल में ताजी मछली नहीं मिल पाती थी.
ताजी मछली के लिए गाजीपुर जेल में खुदवा दिया तालाब
वो जेल के सादा खाना खाकर तंग आ चुका था. इसलिए उसने जेल के अंदर ही एक तालाब खुदवा दिया. उसमें अपनी मनपसंद मछलियां पाली थीं. अब जब भी उसका मन होता, वो तालाब से मछली निकलवाकर बनवाता और खाता लेता. कहा जाता है कि उसकी फिश पार्टी में कई बड़े नेता और अफसर भी शामिल होते थे. जेल के अंदर सब लोग मिलकर जमकर जश्न मनाते थे. यूपी पुलिस में तत्कालीन आईजी बृजलाल ने इस घटना की पुष्टि की थी. उन्होंने बताया था, "गाजीपुर जेल मुख्तार का घर हुआ करती थी. हर शाम जेल के अंदर दरबार लगता था. बड़े अफसर बैडमिंटन खेलने जाते थे."
मुख्तार की आवाभगत में पंजाब पुलिस ने खर्चे 55 लाख
उत्तर प्रदेश में सरकार चाहे जिसकी रहे, चलती मुख्तार अंसारी एंड गैंग की ही थी. लेकिन साल 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद उसके बुरे दिन शुरू हो गए. यूपी में अपने खिलाफ स्थिति होते देख मुख्तार अपने सियासी नेटवर्क का इस्तेमाल करके पंजाब चला गया. वहां के एक मामले में पंजाब पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर ले गई, जहां उसे रोपड़ जेल में बंद कर दिया गया. वहां भी उसकी खूब आवाभगत हुई थी. वो साल 2019 से 2021 के बीच में वहां रहा था. उसे जेल में न सिर्फ विशेष सुविधाएं दी गईं. यहां तक कि पंजाब पुलिस ने सुविधा के नाम पर 55 लाख रुपए खर्च कर दिए.

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