
'माओ का पुनर्जन्म खोजें, दलाई लामा का नहीं...', चीन को तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख की दो टूक
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निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रमुख पेनपा त्सेरिंग ने चीन की दलाई लामा के अगले पुनर्जन्म से जुड़े दावों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि चीन को पहले अपना नेतृत्व पुनर्जन्म प्रक्रिया से गुजरना चाहिए. त्सेरिंग ने चीन की ‘गोल्डन अर्न’ प्रक्रिया को तिब्बत के प्राचीन परंपरा के खिलाफ बताया और कहा कि दलाई लामा खुद तय करेंगे उनका पुनर्जन्म कहां होगा.
दलाई लामा के उत्तराधिकारी (पुनर्जन्म) का मामला फिर से एक बार सुर्खियों में है. तिब्बती बौद्धों की सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा ने चीन और अपने अनुयायियों को साफ़ संदेश दिया है कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी. धर्मगुरु दलाई के इस बयान के बाद चीन, भारत से लेकर अमेरिका तक हलचल तेज हो गई है. वहीं, तिब्बत के लामाओं के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है.
तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख पेन्पा त्सेरिंग ने क्या कहा?
तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख पेन्पा त्सेरिंग ने दलाई लामा के पुनर्जन्म के मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश का सख्त विरोध किया है. उन्होंने चीन के दखलंदाज़ी को बिल्कुल बेमतलब बताया और कहा कि पुनर्जन्म एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है. ऐसे में चीन कैसे तय कर सकता है कि अगला दलाई लामा कहां पैदा होगा. आध्यात्मिक गुरु ख़ुद तय करते हैं कि उन्हें कहां पैदा होना है.
पेन्पा त्सेरिंग का ये बयान धर्मगुरु दलाई लामा के 90वीं वर्षगांठ से पहले आया है. वह धर्मशाला के मैकलियोडगंज से निर्वासित तिब्बती सरकार का नेतृत्व करते हैं.
उन्होंने कहा कि चीन को पहले तिब्बती संस्कृति, बौध धर्म और मृत्यु के बाद के जीवन के बारे में अध्ययन करने की ज़रूरत है. अगर चीन वाक़ई में पुनर्जन्म के प्रक्रिया पर विश्वास करता है तो उन्हें सबसे पहले अपने नेताओं जैसे माओ ज़ेदोंग, जियांग ज़ेमिन और और के पुनर्जन्म को खोजने की कोशिश करनी चाहिए.
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